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आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा सहयोग बढ़ाएंगे भारत, मिस्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने विस्तृत वार्ताओं के दौरान आतंकवाद एवं कट्टरपंथ की दोहरी चुनौतियों से प्रभावशाली तरीके से निपटने के लिए आपसी रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग बड़े स्तर पर बढ़ाने का आज निर्णय लिया।
Author September 2, 2016 23:30 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने विस्तृत वार्ताओं के दौरान आतंकवाद एवं कट्टरपंथ की दोहरी चुनौतियों से प्रभावशाली तरीके से निपटने के लिए आपसी रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग बड़े स्तर पर बढ़ाने का आज निर्णय लिया। भारत एवं मिस्र दोनों आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं, ऐसे में दोनों नेताओं ने इस समस्या को ‘‘सबसे गंभीर खतरों’’ में से एक बताया और रक्षा सहयोग बढ़ाने के अलावा इससे निपटने के लिए बड़े स्तर पर सूचना एवं संचालनात्मक आदान प्रदान करने का निर्णय लिया। मिस्र पूर्वोत्तर एशिया एवं पश्चिम एशिया के बीच अहम लिंक है।

मोदी ने सीसी से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘हमारा मानना है कि बढ़ता कट्टरपंथ, हिंसा और आतंकवाद इस क्षेत्र में एक वास्तविक खतरा है।’’
दोनों देशों ने व्यापारिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत बनाने का भी निर्णय लिया और माना कि दोनों देशों में ऐसे आर्थिक अवसरों को भुनाने के कई मौके हैं जिनका अभी दोहन नहीं किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा व्यापार, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण बढ़ाने का निर्णय लेने के अलावा कई क्षेत्रों में संबंधों को आगे ले जाने के लिए ‘‘कार्रवाई उन्मुख एजेंडे’’ पर सहमति जताई। यहां कल तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचे सीसी ने कहा कि उनकी सरकार द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश सहयोग को बढ़ाने का रोडमैप तैयार करने के साथ साथ भारत के साथ मजबूत सुरक्षा सहयोग विकसित करने की दिशा में काम करेगी।

वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘दोनों नेता आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बताया। उन्होंने सभी स्तरों पर आतंकवाद को हराने के लिए आपसी सहयोग मजबूत करने का अपना संकल्प दोहराया।’’

बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने समग्र अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद सम्मेलन (सीसीआईटी) के संबंध में संयुक्त राष्ट्र में मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।’’ प्रधानमंत्री ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा कि भारत के 1.25 अरब लोग खुश हैं कि मिस्र के राष्ट्रपति यहां आएं हैं और दोनों पक्षों के बीच सहयोग के बहु स्तम्भों के निर्माण पर दोनों ने सहमति जताई।

सिसी ने वार्ताओं को बेहद फलदायी बताते हुए कहा कि आतंकवाद से निपटने से लेकर व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने और जलवायु परिवर्तन से निपटने तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर विचारों पर ‘‘व्यापक सहमति’’ थी। दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर हुई हालिया बातचीत का स्वागत किया। इन नेताओं ने दोनों राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदों के बीच सहयोग के लिए किए गए समझौता पत्र के पूरे होने का भी स्वागत किया।

मोदी ने अपने बयानों में सिसी की तारीफ करते हुए उन्हें ‘‘कई उपलब्ध्यिों वाला व्यक्ति’’ बताया और कहा कि मिस्र एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाला एक स्वाभाविक पुल है। इसने हमेशा ही विकासशील देशों के मुद्दों को उठाया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि नियमित आदान-प्रदान के जरिए रक्षा सहयोग हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने उच्च स्तरीय दौरों, प्रशिक्षणों, अभ्यासों, ट्रांजिट सुविधा और हार्डवेयर सहयोग के जरिए रक्षा संबंधों के विस्तार का स्वागत किया।

बैठक के दौरान, सिसी ने मोदी द्वारा पिछले माह मिस्र को 20 हजार मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति ‘मैत्री मूल्य’ पर किए जाने की पहल की सराहना की। दोनों नेता मैत्री की भावना को बनाए रखने के लिए और सहयोग के दायरे में अन्य खाद्य पदार्थों को भी लाने के लिए सहमत हो गए।’’ जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर, दोनों नेताओं ने यूएनएफसीसीसी और उसके पेरिस समझौते के सिद्धांतों एवं प्रावधानों के आधार पर वैश्विक रूख अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।

व्यापार के संबंध में संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने मिस्र में भारतीय निवेश के विस्तार का स्वागत किया। इस समय यह तीन अरब डॉलर का है। दोनों नेता अपने-अपने देशों से कंपनियों और निगमों को प्रोत्साहित करने के लिए सहमत हुए।
इसमें कहा गया, ‘‘मोदी ने मिस्र की ओर से भारत के निर्माण एवं सेवा क्षेत्रों में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किए गए निवेशों का स्वागत किया। राष्ट्रपति अल-सिसी ने स्वेज नहर आर्थिक क्षेत्र में, विशेष तौर पर पेट्रो-रसायनों, उर्च्च्जा और कृषि क्षेत्रों में भारतीय भागीदारी के लिए निमंत्रण दिया।’

दोनों नेताओं ने सीरिया के नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए सीरियाई संघर्ष के लिए एक समग्र एवं शांतिपूर्ण हल का आह्वान किया। उन्होंने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखने के लिए मौजूदा संकट से जूझ रही इराकी जनता एवं सरकार के प्रति गहरा समर्थन जाहिर किया।

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