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शिक्षाविदों का देश के हर जिले में वैदिक पाठशाला बनाने का सुझाव

शिक्षाविदों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्यालय को प्रस्तावित वैदिक शिक्षा बोर्ड के लिए शीर्ष संस्थान बनाए जाने पर जोर दिया है।

Author नई दिल्ली | April 10, 2016 11:53 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

यूनेस्को धरोहर घोषित किए जा चुके वैदिक मंत्रोच्चार और इसके अध्ययन की विधा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षाविदों ने बदलते माहौल में बच्चों को नैतिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणपत्रों को मान्यता देने, अनुभवी गुरुओं को शिक्षा पद्धति से जोड़ने और देश के प्रत्येक जिले में वैदिक पाठशाला स्थापित करने का सुझाव दिया है।

शिक्षाविदों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्यालय को प्रस्तावित वैदिक शिक्षा बोर्ड के लिए शीर्ष संस्थान बनाए जाने पर जोर दिया है। अखिल भारतीय वेद विद्यालय शिक्षा परिषद के पंडित धीरेंद्र पाठक ने कहा कि वैदिक शिक्षा को आधुनिक संदर्भ में बढ़ावा देने के लिए वैदिक शिक्षा बोर्ड पर विचार चल रहा है। ऐसे में सरकार को यह ध्यान देना चाहिए कि काफी संख्या में ऐसे अनुभवी गुरू हैं जिनके पास औपचारिक डिग्री नहीं है और वैदिक बोर्ड गठित करते समय इन शिक्षकों के हितों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैदिक पाठशालाओं के छात्रों के प्रमाणपत्र जिनमें वेद भूषण, वेद विभूषण शामिल हैं, उन्हें अन्य संस्थाओं के बराबर मान्यता दिलाने और शिक्षकों के लिए समान वेतनमान का प्रावधान किए जाने की जरूरत है।

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वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ईसी अगरवाला ने कहा कि जिस तरह गुरु संदीपन के आश्रम में प्राचीन काल में शिक्षा प्राप्त करके छात्रों ने दुनिया में अपने गुरुओं का मान सम्मान बढ़ाया, वैसे ही गुरुकुल शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देने की जरुरत है। इसके लिए देश के प्रत्येक जिले में वैदिक पाठशाला स्थापित किए जाने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने भी यूनेस्को धरोहर घोषित किए जा चुके वैदिक मंत्रोच्चार और अध्ययन की विधा को संरक्षण देने की पहल की है। वैदिक अध्ययन की परंपरा को संजोने के लिए समिति गठित की गई थी जिसने वैदिक शिक्षा पर बोर्ड गठित करने का सुझाव दिया था। वाराणसी स्थित वेद विद्यालय के शिक्षक पंडित दुर्गेश पांडे ने कहा कि आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, न्यूटन, आर्किमिडीज आदि विज्ञान के क्षेत्र में अनेक ऐसे नाम है जिन्होंने कोई औपचारिक डिग्री हासिल नहीं की लेकिन उनके आविष्कारों एवं शोधों से आज भी दुनिया लाभान्वित है और उन्हें उत्कृष्ट वैज्ञानिक का दर्जा हासिल है।

ऐसे ही श्रेष्ठ और अनुभवी वैदिक गुरू हमारे देश में आज भी मौजूद हैं। इनके पास औपचारिक डिग्री नहीं है और वैदिक बोर्ड गठित करते समय इनका ध्यान रखा जाना चाहिए। शिक्षाविद प्रो. रतन लाल हंगलू ने कहा कि शिक्षा पद्धति पर विचार करें तो देश में दो तरह की पद्धति चल रही है। एक सरकारी स्कूलों के माध्यम से पोषित शिक्षा और दूसरी निजी स्कूलों की महंगी अंग्रेजी भाषा पर आधारित शिक्षा। आज के समय में शिक्षा की ये दोनों पद्धतियां देश की विविधता के सार तत्व को आगे बढ़ाने में विफल होती दिख रही है । उन्होंने कहा कि ऐसे में वैदिक शिक्षा पद्धति काफी कारगर है । इसका उदाहरण है कि प्रतियोगिता परीक्षा में वैदिक गणित छात्रों की सफलता में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है।

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