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देश के दर्जी बनकर रह गए देश के शिक्षक, IIM और IIT पर खड़े किए सवालः जोशी

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने आज कहा कि देश में शिक्षित युवक ‘वस्त्र निर्माता’ बनने की बजाय ‘दर्जी’ (टेलर) बनकर रह गए हैं और ऐसा इसलिए हुआ है...

Author नई दिल्ली | December 10, 2015 08:21 am

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने आज कहा कि देश में शिक्षित युवक ‘वस्त्र निर्माता’ बनने की बजाय ‘दर्जी’ (टेलर) बनकर रह गए हैं और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि प्रौद्योगिकी विकसित करने की बजाय उसे उधार लाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा। पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को नयी विकास योजनाएं पेश करने से पहले देश की प्रौद्योगिकीय शक्ति का आकलन करना चाहिए। उन्होंने अफसोस जताया कि आईआईटी और आईआईएम से निकल रही अत्यधिक कौशल वाला मानव पूंजी केवल विकसित देशों की मदद कर रही है। ये विकसित देश उस दिशा में काम कर रहे हैं जो भारतीय समस्याओं पर विचार नहीं करता।

वह पीएचडी चैंबर द्वारा शैक्षणिक-औद्योगिक इंटरफेस को संस्थागत बनाने के विषय पर आयोजित पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कानपुर से लोकसभा सदस्य जोशी ने कहा कि देश अपनी प्रौद्योगिकी का निर्माण करने के बजाय प्रौद्योगिकी दूसरे देशों से लेने पर अधिक ध्यान दे रहा है जिससे शिक्षित युवा ‘वस्त्र निर्माता’ के बजाय ‘दर्जी’ बनकर रह जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘वाजपेयी जी ने चतुर्भुज सड़कों का अद्भुत विचार रखा था। लेकिन, इसके तहत सड़कों का निर्माण कैसे किया जाएगा, इसकी अवधारणा पर काम पूरी होने से पहले ही वॉल्वो कंपनी ने ऐसी बसें उतार दीं, जो उन सड़कों पर चलाई जा सकती हैं। प्रौद्योगिकी लेना अच्छी बात है लेकिन अंतत: हमारी परियोजनाएं हमारे युवाओं के लिए रोजगार और राजस्व का निर्माण नहीं करतीं बल्कि दूसरों के लिए लाभ अर्जित करने की जमीन तैयार करती हैं।’

जोशी ने कहा, ‘सरकारों को यह समझने की जरूरत है कि उन्हें इस तरह की योजनाओं पर आगे बढ़ने से पहले देश की प्रौद्योगिकी शक्ति का आकलन करने की जरूरत है ताकि उनसे देश को दीर्घकालिक नुकसान नहीं हो।’ उन्होंने कहा कि आईआईटी और आईआईएम जिस उद्देश्य के लिए स्थापित किए गए थे उसकी पूर्ति नहीं कर रहे हैं। ये उन दिशाओं में काम कर रहे हैं जिनमें भारतीय समस्याओं पर विचार नहीं किया जाता।

 

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