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केरल बाढ़ में केंद्र की भूमिका पर उठाए थे सवाल, संघ से जुड़ी पत्रिका ने हटाया संपादकीय

संघ से जुड़ी एक मलयालम साप्ताहिक पत्रिका ने अपनी वेबसाइट से एक संपादकीय को कुछ देर बाद हटा लिया। उस संपादकीय में केरल में बाढ़ के दौरान केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इस बारे में पत्रिका ने सफाई दी कि साइट को हैक कर लिया गया था।

Author August 23, 2018 5:01 PM
केरल के लिए प्रयासरत है केंद्र

किरण गंगाधरण

संघ से जुड़ी मलयालम साप्ताहिक पत्रिका ‘केसरी’ ने बुधवार को उस संपादकीय को अपनी वेबसाइट से हटा लिया, जिसमें केरल में बाढ़ के दौरान केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इस बारे में पत्रिका ने सफाई दी कि साइट को हैक कर लिया गया था। संपादकीय में यह कहा गया था कि, “केंद्र केरल के साथ बदले की भावना से बाढ़ राहत कार्यों में सिर्फ दिखावा कर रही है।” वेबसाइट पर संपादकीय को पहले नीचे ले जाया गया और कुछ देर बाद हटा दिया गया। इस मामले पर केसरी के संपादक ने बताया, ” किसी ने वेबसाइट को हैक कर लिया था और 22 अगस्त को एक लेख प्रकाशित कर दिया। इसका साप्ताहिक पत्रिका और संपादक से कोई लेना-देना नहीं है।”

जब मालयालम डॉट कॉम ने केसरी के ऑफिस से संपर्क किया तो बताया गया कि पत्रिका के संपादक एन आर मधु बुखार की वजह से छुट्टी पर है। इसके बाद मधु के फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने किसी तरह का जवाब नहीं दिया। देर रात एक बयान जारी कर मधु ने कहा कि वेबसाइट हैक की गई थी और एक संपादकीय “डाला गया” था। उन्होंने कहा कि संपादकीय ‘केसरी’ के विचार नहीं थे। इस बाबत पुलिस और साइबर सेल के पास शिकायत दर्ज कराई गई है।

‘संघ के दोस्तों’ को संबोधित करते हुए संपादकीय में कहा गया था कि, “केंद्र सरकार ने मंगलवार को केरल के लिए 600 करोड़ रुपये जारी किए। जबकि राज्य ने 2600 करोड़ की मांग की थी। केंद्र द्वारा अपर्याप्त सहायता को लेकर यहां के लोगों में गुस्सा है। यदि अभी हम इस बारे में आवाज नहीं उठाते तो दक्षिणपंथ के साथ सहानुभूति रखने वाले लोग, केरल और हमारे साथ धोखा होगा। केंद्र को इस बात की जानकारी है कि बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में संघ से जुड़े लोग भी प्रभावित हुए हैं, लेकिन एक छोटे राजनीतिक लाभ के लिए पूरे केरल को दंडित किया जा रहा है।”

संपादकीय में केरल के मुख्यमंत्री जो सीपीएम के हैं, उनकी भी प्रशंसा की गई थी। जबकि सीपीए के साथ भाजपा व संघ का खूनी संघर्ष का इतिहास रहा है। लिखा था कि, “केंद्र ने सीएम विजयन द्वारा  किए गए राजनीतिक शालीनता को भी नजरअंदाज किया।” बाद में उस संपादकीय को एक पुराने संपादकीय “धर्म नहीं, देश महत्वपूर्ण है” शीर्षक के साथ बदल दिया गया। बता दें कि यह साप्ताहिक पत्रिका जो कि बुधवार की सुबह तक बाजार में पहुंच जाती है, रात तक नहीं पहुंची।

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