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योगी और मायावती को चुनाव प्रचार से रोका

लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान के दौरान नेताओं के विवादित बयानों पर सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती को सांप्रदायिक बयान देने के कारण अलग-अलग अवधि के लिए चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है।

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती को सांप्रदायिक बयान देने के कारण अलग-अलग अवधि के लिए चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है।

लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान के दौरान नेताओं के विवादित बयानों पर सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती को सांप्रदायिक बयान देने के कारण अलग-अलग अवधि के लिए चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है। आयोग ने योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार करने पर 72 घंटे की रोक लगा दी है। मायावती 48 घंटे प्रचार नहीं कर पाएंगी। दोनों नेताओं को लेकर आयोग का ताजा आदेश मंगलवार सुबह छह बजे से प्रभावी होगा। आयोग ने दोनों नेताओं के खिलाफ अलग अलग आदेश जारी किए हैं।
चुनाव आयोग के प्रधान सचिव अनुज जयपुरिया द्वारा जारी आदेश में योगी और मायावती को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा गया है कि दोनों नेता इस अवधि में किसी भी जनसभा, पदयात्रा और रोड शो आदि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इतना ही नहीं वे प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में साक्षात्कार भी नहीं दे सकेंगे। चुनाव आयोग का आदेश 16 अप्रैल सुबह छह बजे से लागू होगा। चुनाव आयोग के निर्देश से साफ है कि योगी आदित्यनाथ 16, 17 और 18 अप्रैल को कोई प्रचार नहीं कर पाएंगे। मायावती 16 और 17 अप्रैल को कोई चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगी।

मायावती को उत्तर प्रदेश के देवबंद में एक जनसभा के दौरान मुसलिम मतदाताओं से एक विशेष पार्टी को वोट नहीं देने की अपील करने की शिकायत पर आयोग ने चुनाव आचार संहिता का दोषी पाया था। मायावती ने सात अप्रैल को कहा था, ‘कांग्रेस बाकी पेज 8 पर मानकर चल रही है हम जीतें या न जीतें लेकिन गठबंधन नहीं जीतना चाहिए, इसलिए कांग्रेस ने ऐसी जाति और ऐसे धर्मों के लोगों को खड़ा किया है जिससे भाजपा को फायदा पहुंचे। मैं मुसलिम समाज के लोगों को कहना चाहती हूं कि आपको वोट बांटना नहीं है, बल्कि एकतरफा वोट देकर गठबंधन को कामयाब बनाना है।’ मायावती के इस बयान को लेकर चुनाव आयोग ने उनसे जवाब तलब किया था।

इसके अलावा चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ को मेरठ में जनसभा में ‘अली’ और ‘बजरंग बली’ शब्दों का इस्तेमाल करते हुए विवादित बयान देने के कारण आचार संहिता का दोषी करार देते हुए भविष्य में ऐसे बयान नहीं देने की चेतावनी जारी की थी। योगी ने कहा था, ‘अगर कांग्रेस, सपा, बसपा को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है।’ योगी ने देवबंद में बसपा प्रमुख मायावती के उस भाषण की तरफ इशारा करते हुए यह टिप्पणी की थी, जिसमें मायावती ने मुसलिमों से सपा-बसपा गठबंधन को वोट देने की अपील की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान बसपा प्रमुख मायावती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से विद्वेष फैलाने वाले भाषणों का सोमवार को संज्ञान लिया और चुनाव आयोग से जानना चाहा कि उसने इनके खिलाफ अभी तक क्या कार्रवाई की है। इसके बाद चुनाव आयोग ने कार्रवाई का एलान किया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने चुनाव प्रचार के दौरान जाति और धर्म को आधार बना कर विद्वेष फैलाने वाले वाले भाषणों निपटने के लिए आयोग के पास सीमित अधिकार होने के कथन से सहमति जताते हुए चुनाव आयोग के एक प्रतिनिधि को मंगलवार को तलब किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने कहा कि उनके हाथ में कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पहले नोटिस जारी करेंगे, फिर परामर्श जारी होगा और फिर शिकायत दर्ज की जाएगी।’

जजों ने आयोग के अधिवक्ता से मायावती और योगी आदित्यनाथ के कथित नफरत फैलाने वाले भाषणों के कारण उनके खिलाफ उठाए कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी। इसपर आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि वह पहले ही दोनों नेताओं को नोटिस जारी कर चुका है। इस दौरान पीठ ने दो टूक कहा कि हमें मायावती और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उठाए कदमों के बारे में बताएं। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील ने शीर्ष अदालत से कहा कि वह कार्रवाई करने के मामले में शक्तिहीन और दंतहीन है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चुनाव आयोग के अधिकारों की पड़ताल करेगा, क्योंकि यह भी एक संवैधानिक निकाय है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मंगलवार को अदालत में मौजूद रहें। अब इस मामले मंगलवार को साढ़े 10 बजे सुनवाई होगी।

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