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राजस्थान में उपचुनावों की घोषणा के साथ ही भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर

राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उपचुनावों की घोषणा के साथ ही भाजपा और कांग्रेस की सियासत गरमा गई है।

Author जयपुर | December 29, 2017 2:21 AM

राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उपचुनावों की घोषणा के साथ ही भाजपा और कांग्रेस की सियासत गरमा गई है। राज्य में अजमेर और अलवर लोकसभा सीट के साथ ही मांडलगढ़ विधानसभा सीट का उपचुनाव 29 जनवरी को होगा। इन सीटों पर भाजपा का कब्जा होने के साथ ही अब उपचुनावों में वसुंधरा सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले इन उपचुनावों में कांग्रेस पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। राज्य में भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बन गए उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबला होगा। विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले होने के कारण इसे दोनों दल सेमीफ ाइनल के तौर पर भी ले रहे हैं। प्रदेश भाजपा इन उपचुनावों को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

प्रत्याशी चयन के मामले में कांग्रेस ने भाजपा पर बढ़त बना ली है। कांग्रेस ने अलवर सीट से पूर्व सांसद डाक्टर करण सिंह यादव को उम्मीदवार बना कर भाजपा को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। यादव बहुल अलवर सीट पर भाजपा किसी दमदार यादव प्रत्याशी की तलाश में है। इस मामले में कांग्रेस ने पहल कर यादव उम्मीदवार की घोषण कर भाजपा को संकट में डाल दिया है। प्रदेश भाजपा के प्रभारी अविनाश राय खन्ना यहां लोकसभा की दोनों सीटों के प्रत्याशी तलाशने में जुटे हुए हैं। खन्ना ने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं के उपचुनावों से पीछे हटने से ही साबित होता है कि भाजपा की जीत तय है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अलवर और अजमेर लोकसभा उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है।

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कांग्रेस ने लोकसभा की दोनों सीटों के साथ ही मांडलगढ़ विधानसभा सीट को लेकर सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाई है। कांग्रेस का फोकस है कि इन उपचुनावों में वसुंधरा सरकार की कार्यशैली को निशाना बना कर जनता के बीच जाया जाए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि जनता वसुंधरा सरकार से तंग आ गई है और बदलाव के मूड में है। इसी के चलते अब प्रदेश भाजपा और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शरण में जा रहे हैं। पायलट का कहना है कि उपचुनावों के दौरान ही प्रदेश भाजपा ने राज्य में दो बडेÞ कार्यक्रम रख प्रधानमंत्री मोदी को बुलाया है। इससे ही साबित होता है कि प्रदेश सरकार अपने बूते उपचुनावों में जनता का सामना नहीं कर सकती है। पायलट का कहना है कि मुख्यमंत्री की कोई साख जनता के बीच नहीं बची है। और प्रदेश भाजपा के नेताओं की जनता के बीच जाने की हिम्मत ही नहीं है। प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में जो हताशा का माहौल है, उससे ही सरकार घबरा गई है।

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