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बेंगलुरु से कोलकाता लाया गया जिंदा ‘दिल’, झारखंड के मरीज की बची जान, पूर्वी भारत का पहला मामला

शनिवार को बेंगलुरु में रहने वाले 21 वर्षीय वरुण बीके को एक रोड एक्सीडेंट के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद वरुण के परिजनों ने उसका दिल दान करने की सहमति दे दी।

पूर्वी भारत में हुआ पहला हार्ट ट्रांसप्लांट। (image source-Facebook) (प्रतीकात्मक तस्वीर)

झारखंड के व्यक्ति का कोलकाता के एक अस्पताल में सुरक्षित हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। इस दौरान ट्रांसप्लांट के लिए दिल बेंगलुरु से लाया गया। बता दें कि सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट का यह पूर्वी भारत में पहला मामला है। गौरतलब है कि इस दिल को ग्रीन कोरिडोर बनाकर रिकॉर्ड समय में मरीज तक पहुंचाया गया। जिसके लिए जिम्मेदार अथॉरिटी यकीनन बधाई के पात्र हैं।

बता दें कि झारखंड में रहने वाले दिलचंद सिंह को डाइलेटिड कार्डियोमायोपैथी की समस्या थी। इस बीमारी में मरीज का दिल सही तरीके से खून को पम्प नहीं कर पाता और फिर धीरे-धीरे दिल में समस्या बढ़ती ही चली जाती है। दिलचंद सिंह पिछले एक माह से कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती थे और उन्होंने साल 2016 से हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए अर्जी दी हुई थी। इसी बीच शनिवार को बेंगलुरु में रहने वाले 21 वर्षीय वरुण बीके को एक रोड एक्सीडेंट के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद वरुण के परिजनों ने उसका दिल दान करने की सहमति दे दी। जिसके बाद दिलचंद और वरुण ब्लड ग्रुप मैच होने के बाद वरुण का दिल कोलकाता में फोर्टिस अस्पताल में भर्ती दिलचंद को ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया गया।

इसके बाद वरुण के दिल को डॉक्टरों की देख-रेख में विमान के रास्ते कोलकाता लाया गया। जहां कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट से दिल को ईएम बाइपास होते हुए सिर्फ 22 मिनट में फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया। दिल को अस्पताल समय से पहुंचाने के लिए प्रशासन द्वारा ग्रीन कोरिडोर बनाया गया और जिस सफर में 50 मिनट से 1 घंटा लगता, उस दूरी को सिर्फ 22 मिनट में कवर करके दिल सुरक्षित अस्पताल पहुंचा दिया गया। इस सफल हार्ट सर्जरी को डॉ. केएम मंदाना और डॉ. तापस रायचौधरी की देखरेख में किया गया। फिलहाल मरीज को हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है। कोलकाता स्टेट ऑर्गन डोनेशन नोडल ऑफिसर अदिति किशोर सरकार का कहना है कि इस मुश्किल काम को बेहतरीन तरीके से अंजाम दिया गया है। इस तरह की कोशिश पहले भी की गई है, लेकिन वह किन्हीं कारणों से सफल नहीं रहीं थी।

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