महाराष्ट्र में पिछले दो हफ्ते के अंदर महसूस किए गए भूकंप के 29 झटकों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ इस घटना को “अर्थक्वेक स्वॉर्म” यानी कि भूकंप का झुंड कह रहे हैं। इसका मतलब है कि एक सीमित क्षेत्र में कम समय के भीतर लगातार आने वाले छोटे भूकंप के झटके और महाराष्ट्र में यह पिछले 16 दिन के अंदर 29 बार हुआ है।

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक नासिक में झटके महसूस किए गए हैं जबकि पालघर में भी इसका असर देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, बीते शुक्रवार (14 अगस्त) को ही नासिक और उसके आस-पास पांच झटके दर्ज किए गए।

अकेले नासिक में महसूस हुए हैं 24 झटके

एक्सप्रेस द्वारा रिव्यू किए गए डेटा से पता चलता है कि 30 जुलाई से 14 अगस्त के बीच पूरे महाराष्ट्र में कम से कम 29 भूकंप के झटके रिकॉर्ड किए गए। इनमें से 24 नासिक और उसके आस-पास, चार पालघर में और एक झटका नागपुर में महसूस हुआ। भूकंप के इन झटकों की तीव्रता 2 से 4.3 मैग्नीट्यूड थी और 5 से 8 किमी. की गहराई में इनका केंद्र था।

नासिक में 6 अगस्त को आया पहला भूकंप

इस दौरान सबसे बड़ा झटका 8 अगस्त को नासिक में 5 किमी. की गहराई पर रिकॉर्ड किया गया जिसकी तीव्रता 4.3 मैग्नीट्यूड थी। 6 अगस्त को नासिक में सुबह 5.41 बजे से शाम 5.54 बजे के बीच छह झटके महसूस किए गए। 8 अगस्त को चार और झटके रिकॉर्ड किए गए, जबकि 10 अगस्त को चार और झटके रिपोर्ट किए गए।

भूकंप के इन झटकों पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

16 दिन के अंदर 29 बार धरती के कांपने की घटना किसी आम इंसान के लिए बेहद चिंताजनक हो सकती है, लेकिन इसको लेकर एक्सपर्ट की क्या राय है? IIT बॉम्बे में भूकंप स्पेशलिस्ट और सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसर दीपांकर चौधरी ने एक्सप्रेस को बताया है, “छोटे भूकंपों की संख्या में वाकई में खतरनाक बढ़ोतरी हुई है। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है।”

चौधरी ने आगे कहा है कि भूकंप के झटके आमतौर पर मॉनसून के मौसम में और उसके बाद आते हैं और डेक्कन पठार इलाके में ये ‘हाइड्रो-सीस्मिसिटी’ की वजह से होता है। चौधरी के मुताबिक, “नासिक बड़े डेक्कन पठार इलाके में आता है जहां अधिकतर बेसाल्टिक चट्टानें हैं। ऐसी बेसाल्टिक चट्टानों में कभी भी दरारें आ सकती हैं। जैसे ही मॉनसून शुरू होता है चट्टान के ये छेद और दरारें पानी से भर जाती हैं। समय के साथ इससे पोर प्रेशर बनता है। इसका मतलब है कि चट्टानों की दरारों के अंदर पानी घुसने से प्रेशर बनता है। जब यह ज्यादा प्रेशर बनता है तो यह छोटे झटकों के रूप में अपनी एनर्जी छोड़ता है।”

हाल फिलहाल में ऐसी गतिविधि महाराष्ट्र में नहीं हुई थी। पालघर में सितंबर 2023 में भी ऐसे ही भूकंप आए थे, जबकि फरवरी 2019 में भी इस इलाके में एक और भूकंप आया था। नासिक और पालघर इंडियन स्टैंडर्ड IS 1893, पार्ट 1 के तहत सिस्मिक जोन III में आते हैं, जो भूकंप के हल्के खतरे को दिखाता है।

क्या आ सकती है कोई बड़ी आपदा? मुंबई कितनी सेफ

नासिक और पालघर में आए इन भूकंप के झटकों से लोगों में एक डर का माहौल है। लोग ये सोच रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र पर कोई बड़ी आपदा आने वाली है, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि अभी के झटकों पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि यह कोई बड़ा भूकंप आने वाला हो। एक्सपर्ट का कहना है कि इसकी कम गहराई के कारण भूकंप के झटके ज्यादा दूर तक नहीं जाते क्योंकि यह तेजी से कम हो जाते हैं। इसका मतलब है कि नासिक के भूकंप का असर मुंबई तक जाने की संभावना बहुत कम है।

यह भी पढ़ें: लेह में 5.5 तीव्रता का भूकंप, सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके

लेह में भूकंप के झटके महसूस किए गए। लद्दाख के लेह में यह झटके आज सुबह 6:05 बजे आए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 रही। यहां पढ़ें पूरी खबर…