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8 दिनों में 12 लाख कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक, रोजाना सुबह पौने चार बजे खुलता है बाबा बैद्यनाथ मंदिर

सुबह करीबन साढ़े तीन बजे बाबा मंदिर के गर्भगृह का पट खुलता है । नियम के मुताबिक मंदिर के सरदार पंडा गुलाब चन्द्र ओझा के नेतृत्व में बाबा की सरकारी पूजा रोजाना होती है। मंत्रोच्चारण व आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए पौने चार बजे सुबह से बाबा का दरवार खोल दिया जाता है । अरघा के जरिए जल चढ़ाने का सिलसिला देर शाम आठ बजे तक चलता रहता है ।

सुलतानगंज से देवघर तक कांवड़ियां रास्ते का मुआयना करने पर इस संबाददाता ने पाया कि भागलपुर, मुंगेर, जमुई, बांका और देवघर प्रशासन ने भीड़ पर काबू करने , श्रद्धालुओं की हिफाजत व सुविधा के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।

सावन महीना के आठ दिनों के अंदर अबतक देवघर बाबा वैद्यनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंग का करीबन अमूमन बारह लाख कांवड़ियों व श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया है और अनवरत यह सिलसिला जारी है। सुलतानगंज से देवघर 105 किलोमीटर का रास्ता बोलबम के जयकारे से गूंज रहा है। रास्तों में तमाम दिक्कतों के बाद भी इनकी अटूट आस्था बाबा के दरवार में खींच रही है। रोजाना एक लाख से ज्यादा कांवड़िए सुलतानगंज से जल कांधे पर ले पैदल देवघर यानी देवताओं के घर कूच कर रहे है। सावन महीने के अंत रक्षाबंधन तक यह भक्तिमय माहौल बना रहेगा। हालांकि भादों महीने में भी कांवड़ियों का आना जारी रहता है। मगर सावन जितनी तायदाद नहीं होती। सोमवार को देवघर में भीड़ ज्यादा होती है जबकि इतवार की रात से ही कांवड़ियों की लंबी कतार बाबा मंदिर में प्रवेश के वास्ते लग जाती है, जो सोमवार शाम तक वैसी ही रहती है।

सुबह करीबन साढ़े तीन बजे बाबा मंदिर के गर्भगृह का पट खुलता है। नियम के मुताबिक मंदिर के सरदार पंडा गुलाब चन्द्र ओझा के नेतृत्व में बाबा की सरकारी पूजा रोजाना होती है। मंत्रोच्चारण व आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए पौने चार बजे सुबह से बाबा का दरवार खोल दिया जाता है। अरघा के जरिए जल चढ़ाने का सिलसिला देर शाम आठ बजे तक चलता रहता है। इसके बाद बाबा का श्रृंगार किया जाता है। यहां एक बात बताना जरूरी है कि बाबा के श्रृंगार के वास्ते फूल मालाएं देवघर जेल के कैदियों की बनाई होती है। रोजाना वहां के सिपाही अपने सिर पर रख नियमपूर्वक बाबा मंदिर लाते है। यह परंपरा सैकड़ों सालों से चल रही है। इसका उल्लेख गजेटियर में भी मिलता है।

सावन और भादों दो महीने शिवलिंग पर अरघा के जरिए जल चढ़ाने का प्रबंध बीते करीबन चार साल से किया गया है। बेकाबू श्रद्धालुओं की भीड़ और कतारबद्ध हो सबका जल चढ़ जाए इसी ख्याल से जिला प्रशासन और पंडा समाज की धर्म रक्षणी सभा की रजामंदी से किया गया है। यहां के उपायुक्त राहुल कुमार बताते है कि वीवीआइपी तक के लिए विशेष दर्शन एक महीने के लिए बंद कर दिया गया है। बीते सावन के पहले सोमवार को कांवड़ियों के सैलाब का यह आलम था कि शाम तक नंदन पहाड़ तक दस किलोमीटर कतार लगी थी।

सुलतानगंज से देवघर तक कांवड़ियां रास्ते का मुआयना करने पर इस संबाददाता ने पाया कि भागलपुर, मुंगेर, जमुई, बांका और देवघर प्रशासन ने भीड़ पर काबू करने , श्रद्धालुओं की हिफाजत व सुविधा के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। रास्ते का सनसे ज्यादा करीबन साठ किलोमीटर का रास्ता बांका ज़िले में पड़ता है। वहां के एसपी अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि अबतक पुलिस चौकसी की वजह से कोई वारदात नहीं हुई है। सुलतानगंज के गंगानदी घाट पर चिकनी मिट्टी की वजह से फिसलन में कोई कांवड़ियां डुबे नहीं इसके लिए एसडीआरएफ और गोताखोर तैनात किए है। कांवड़ियों के नंगे पांव चलने के लिए कच्चे रास्ते पर बालू तो जैसे तैसे बिछवाई गई है। मगर बारिश न होने से बालू वाला रास्ता अग्निपथ बन गया है। गर्म बालू से इनके पांवों में छाले बना जख्मी कर दे रही है। दूसरा इन रास्तों पर स्ट्रीट लाइट का कोई प्रबंध नहीं है। वहां लगी दुकानों जेनरेटरों के भरोसे रौशन है। और कांवड़ियों के लिए पगडंडियों पर चलने के लिए सहारा है।

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