ताज़ा खबर
 

1965 की जंग के दौरान कराची में जन्मा शख्स अब बनेगा भारतीय नागरिक, 50 साल चक्कर काट चुके पिता ने कही दिल जीतने वाली बात

1965 के युद्ध के दौरान आसिफ की मां ने कराची में उन्हें जन्म दिया था। इसके दो साल बाद से ही उनके पिता ने अथॉरिटीज के चक्कर काटने शुरू कर दिए थे। लंबे इंतजार के बाद अब उन्हें सफलता मिली है।

आसिक कराडिया और उनके पिता (एक्सप्रेस फोटोः प्रदीप दास)

77 साल के अब्बास करादिया की करीब 50 साल की मेहनत अब जाकर अंजाम तक पहुंचने वाली है। दरअसल उनके 54 वर्षीय बेटे को आखिरकार भारत की नागरिकता मिलने जा रही है। नागरिकता के लिए अथॉरिटीज के चक्कर काटते-काटते वे इमिग्रेशन और सिटिजनशिप एक्ट के विशेषज्ञ बन चुके हैं। दरअसल यह पूरी कहानी 50 साल पहले साल 1965 में शुरू हुई थी। जब अब्बास ने अपनी पत्नी और बेटे को वापस पाने के लिए भारत और पाकिस्तान की संस्थाओं के चक्कर काटने शुरू किए थे। आखिरकार अब जाकर भारत सरकार ने उनके उम्रदराज बेटे को भारतीय नागरिकता देने पर मजबूर कर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान अब्बास ने हंसते दिल जीतने वाली बात कही। उन्होंने कहा, ‘सिटिजनशिप का कायदा खतरनाक है पर बहुत मजबूत है और मजबूत होना भी चाहिए नहीं तो लोग असंवैधानिक तौर पर देश में घुस जाएंगे।’ उन्होंने कहा कि अब वे मुस्कुरा सकते हैं। दरअसल पिछले सोमवार (1 अप्रैल) को करादिया के 54 वर्षीय बेटे आसिफ को पता चला कि उसे भारतीय नागरिकता मिलने वाली है। आसिफ उस समय दो साल के थे जब वह भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद भारत आए थे।’

asif 1965 में जन्मे आसिफ को अब अब मिलेगी नागरिकता

अब्बास के पिता ने बताया कि उस समय हमें किसी ने नहीं बताया था कि उन्हें आसिफ के लिए भी अलग से नागरिकता लेनी पड़ेगी। अगर उन्हें यह बात पहले पता होती तो उन्हें इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। मुंबई के जोगेश्वरी में अब्बास ऑटो पार्ट्स की मरम्मत का काम करते थे और अब रिटायर हो चुके हैं। करादिया ने बताया कि उनकी लड़ाई 1965 में शुरू हो गई थी। बंटवारे के तीन साल बाद अब्बास ने मुंबई में जैबुनिसा जमालुद्दीन से शादी की थी जो पाकिस्तान से भारत आई थी। साल 1965 में उनकी पत्नी गर्भवती हुई उस दौरान वह कराची में अपने माता-पिता के घर कराची गई हुई थी जहां पर उनके बेटे आसिफ का 19 अप्रैल को जन्म हुआ। लेकिन जब वह मुंबई लौटने वाले थे तब तक युद्ध छिड़ चुका था। इसके बाद अब्बास ने अपनी पत्नी जैबुनिसा और बेटे को वापस लाने के लिए भारतीय उच्चायोग, पाकिस्तान सरकार के विदेश मंत्रालय के कई चक्कर काटे। उस समय आसिफ ने जैबुनिसा के पासपोर्ट पर यात्रा की, क्योंकि उस समय किसी नवजात शिशु के लिए कोई पासपोर्ट जारी नहीं किए गए थे।

National Hindi News, 05 April 2019 LIVE Updates: जानें दिनभर की अपडेट्स

1972 में जब जैबुनिसा को अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट को जमा करने और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए क्षतिपूर्ति के लिए एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद भारतीय नागरिकता प्रदान की गई थी, उस दस्तावेज में आसिफ का भी नाम था। उस समय अब्बास और उनकी पत्नी को लगा कि ये पूरा मामला सुलझ चुका है लेकिन ऐसा नहीं था। इस दौरान जब आसिफ ने स्कूल जाना शुरू किया तो उसके दस्तावेजों में उसका जन्मस्थान कराची था। आसिफ ने साल 1988 में मुंबई की एक महिला शकेरा सुजर के शादी की और दंपती के तीन बच्चे हैं। अब्बास अब 53 साल के हो चुके हैं और मुंबई के माहिम रेस्टोरेंट में काम करते हैं। अपनी नागरिकता को सुरक्षित करने के लिए आसिफ ने 1997 और 2003 में आवास प्रमाण पत्र और भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र हासिल किया था।

आसिफ के लिए एक बार फिर उस समय मुसीबत शुरू हो गई जब 2012 में उन्होंने हज जाने के लिए आवेदन दिया। उस समय अधिकारियों ने उनका आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ था। सामने कोई विकल्प न होने पर उनके परिवार ने दीर्घकालिक वीजा के लिए आवेदन किया था लेकिन उस दौरान उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया। साल 2015 में दीर्घकालिक वीजा के लिए आवेदन के इनकार के बाद विदेश मंत्रालय ने उन्हें एक महीने के अंदर भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कहा। साथ ही ऐसा न कर पाने पर उन्हें पाकिस्तान भेजने की बात भी कही। इससे डरे हुए परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में वकील आशीष मेहता से संपर्क किया। आखिरकार आसिफ को तीन महीने की लगातार सुनवाई के बाद अब केंद्र सरकार 10 दिन के भीतर उन्हें नागरिकता प्रमाण पत्र देने की बात कही।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App