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पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले दुर्गापूजा में जनसंपर्क की होड़

पूजा के दौरान ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कोलकाता के दौरे पर आएंगे। वैसे, महानगर की ज्यादातर पूजा समितियों पर तृणमूल कांग्रेस के भारी-भरकम नेताओं-मंत्रियों का कब्जा है। ये लोग अध्यक्ष, संरक्षक या सलाहकार के तौर पर इन आयोजनों से जुड़े हैं।

दुर्गापूजा में राजनीतिक रंग तो लगभग चार दशक पहले वाममोर्चा सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही घुलने लगा था।

पश्चिम बंगाल में सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा का जनसंपर्क बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना सियासी दलों के लिए कोई नई बात नहीं है। पहले वाममोर्चा का इस पर एकाधिकार था और फिर सात साल पहले सत्ता में आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सियासी फायदे के लिए बड़े पैमाने पर पूजा के सीजन का इस्तेमाल शुरू किया। अब अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले आखिरी दुर्गापूजा होने की वजह से तृणमूल कांग्रेस और नंबर दो की कुर्सी की ओर बढ़ती भाजपा के बीच इस मौके को सियासी फायदे के लिए भुनाने की होड़ मच गई है।

दुर्गापूजा में राजनीतिक रंग तो लगभग चार दशक पहले वाममोर्चा सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही घुलने लगा था। लेकिन यह पूजा के दौरान राजनीतिक हितों के लिए आयोजन समितियों और इस दौरान जुटने वाली भीड़ के इस्तेमाल तक ही सीमित था। लेकिन बीते कुछ वर्षों से इस आयोजन पर गहरा सियासी रंग चढ़ने लगा है। अब तो बीते दो-तीन वर्षों से खासकर महानगर की ज्यादातर समितियां दीदी यानी ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के रंग में रंग चुकी हैं। भाजपा अबकी उसका यह दबदबा तोड़ने का प्रयास कर रही है। बीते कुछ वर्षों के दौरान हुए विभिन्न चुनावों और उपचुनावों में अपने वोटों में इजाफे के बाद पार्टी अब खुद को बंगाल की परंपरा व संस्कृति से और ज्यादा जोड़ने का प्रयास कर रही है।
अबकी कांग्रेस भी इस होड़ में शामिल हो गई है।

पूजा के दौरान ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कोलकाता के दौरे पर आएंगे। वैसे, महानगर की ज्यादातर पूजा समितियों पर तृणमूल कांग्रेस के भारी-भरकम नेताओं-मंत्रियों का कब्जा है। ये लोग अध्यक्ष, संरक्षक या सलाहकार के तौर पर इन आयोजनों से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो हर साल की तरह अबकी भी महालया के पहले से ही पूजा समितियों का उद्घाटन शुरू कर दिया। अब लगभग एक सप्ताह तक होने वाले इस आयोजन के दौरान तृणमूल की ओर से हजारों शिविर लगा कर पार्टी और सरकार की उपलब्धियों का प्रचार किया जाता है।

उधर, भाजपा ने भी पूजा के सीजन में जनसंपर्क के इस मौके का अधिक से अधिक सियासी इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। सूत्रों ने बताया कि पार्टी इस बार महानगर की कई प्रमुख पूजा समितियों के पास अपने शिविर लगाएगी। इसके जरिए एक ओर जहां केंद्र सरकार की अब तक की उपलब्धियों और विभिन्न योजनाओं का प्रचार किया जाएगा, वहीं ममता बनर्जी सरकार की कथित नाकामियों की भी पोल खोली जाएगी। राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ ने भी इस बार अपने शिविरों की तादाद बढ़ाने का फैसला किया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं को अपने मोहल्ले की पूजा समितियों के साथ संपर्क बढ़ाने का निर्देश दिया है। उनसे राज्य की खासकर ऐसी पूजा समितियों को पहचान कर उनसे संपर्क बढ़ाने को कहा गया है जिन समितियों के साथ तृणमूल कांग्रेस नेताओं के नजदीकी संबंध नहीं हैं। भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष अपने चुनाव क्षेत्र खड़गपुर में कुछ पूजा समितियों के पंडालों का उद्घाटन करेंगे। मुकुल राय तृणमूल कांग्रेस में रहते पूजा पंडालों के उद्घाटनों में खास सक्रिय नहीं थे। लेकिन इस बार वे भी महानगर की कई पूजा समितियों के पंडालों का उद्घाटन करेंगे।

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