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दिल्ली में तेजी से बढ़ रहा है नशे का कारोबार, माल, सामान और बाबाजी की बूटी के नाम पर बिकता नशा

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की मानें तो गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पूछताछ में कबूला है कि वे ऐसे लोगों को नशीले पदार्थों की तस्करी करते थे, जो या तो आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं या फिर स्कूल-कॉलेज के छात्र हैं।

Author February 12, 2019 6:48 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

निर्भय कुमार पांडेय

राजधानी में मादक पदार्थों की खपत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले शहर के कुछ बड़े होटलों, रेस्तरां, पब और चुनिंदा पॉश इलाकों में ही मादक पदार्थ की खेप पकड़ी जाती थी, लेकिन अब अन्य इलाकों में भी मादक पदार्थों की खपत हो रही है। इन इलाकों में मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त माल, सामान व बाबाजी की बूटी के नाम से की जाती है। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली के दूरदराज के इलाकों में भी मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े गिरोह सक्रिय हैं और अपने गुर्गों की मदद से बड़ी आसानी से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं। ये गिरोह झुग्गी बस्ती, पार्क और स्कूलों के आसपास भी सक्रिय हैं।

दिल्ली पुलिस के सालाना आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2018 में 196 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए थे। वहीं, 2017 में 51 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की मानें तो गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पूछताछ में कबूला है कि वे ऐसे लोगों को नशीले पदार्थों की तस्करी करते थे, जो या तो आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं या फिर स्कूल-कॉलेज के छात्र हैं। बीते साल दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई झपटमारों और वाहन चोरों को गिरफ्तार किया था, जो मादक पदार्थों के आदी थे और नशे की लत की वजह से इन वारदातों को अंजाम दे रहे थे।
इन जगहों पर बिकता है नशा

दिल्ली की अधिकतर झुग्गी बस्तियों, तैमूर नगर, नेब सराय, छतरपुर, मदन गीर, सुभाष नगर, आरकेपुरम, खिड़की एक्सटेंशन, मालवीय नगर, मुनिरका, जेजे बस्ती जहांगीरपुरी, आइएनए, द्वारका, उत्तम नगर, रोहिणी का जपानी पार्क, मजनू का टीला, इंदिरा विकास कॉलोनी, कश्मीरी गेट, शास्त्री पार्क, शास्त्री नगर, नरेला, बवाना व अलीपुर के अलावा दक्षिणी दिल्ली के ज्यादातर रेस्तरां और पॉश कॉलानियों में मादक पदार्थों की भारी मांग है। झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगोें का आरोप है कि स्थानीय पुलिस को जानकारी होने के बावजूद इस धंधे से जुड़े गिरोह तस्करी को अंजाम देते हैं।

तस्करों का आतंक: झुग्गी बस्तियों में नशे का कारोबार करने वालों का कितना आतंक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते साल तैमूर नगर झुग्गी बस्ती में मादक पदार्थ खरीदने आए लोगों के साथ बेचने वालों की लड़ाई हो गई, जिसके बाद एक तस्कर पिस्तौल लहराता हुआ झुग्गी बस्ती से बाहर निकला और गाली-गलौज करने लगा। वहां के निवासी रूपेश बसोया ने जब गाली-गलौज करने से रोका तो बदमाश ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

सोशल मीडिया पर तलाशते हैं ग्राहक: हेरोइन व अन्य मादक पदार्थों की तस्करी में बड़े स्तर पर विदेशी नागरिक भी शामिल होते हैं। समय-समय पर पकड़े गए इन तस्करों ने खुलासा किया कि वे ग्राहक तलाशने के लिए फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी इनके चंगुल में आसानी से फंस जाते हैं और नशे के आदी बन जाते हैं।

50 से 500 रुपए में उपलब्ध: राजधानी के जिन इलाकों में मादक पदार्थों की तस्करी की जाती है, वहां इसे लोग माल, सामान या बाबाजी की बूटी के नाम से पुकारते हैं। ऐसे इलाकों में मादक पदार्थों की पुड़िया 50 से 500 रुपए तक में मिलती है। पूछने पर लोगों ने बताया कि इन्हें खरीदने वाले सभी उम्र और आय वर्ग के लोग होते हैं। राजधानी के कई ऐसे पार्क हैं, जिनके आसपास इस धंधे से जुड़े लोग सक्रिय होते हैं। ये लोग पुलिस की आंखों में धूल झोंककर इस तस्करी को अंजाम देते हैं।

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