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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के एक दिन पहले नाटकीय घटनाक्रम, सीबीआइ निदेशक के आवास के बाहर पकड़े आइबी के 4 कर्मी

सीबीआइ ने बयान जारी कर कहा कि आलोक वर्मा सीबीआइ निदेशक और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने हुए हैं। जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग इस मामले की जांच कर रहा है, तब तक एम नागेश्वर राव निदेशक का काम करेंगे।

ंछुट्टी पर भेजे गए सीबीआइ प्रमुख आलोक वर्मा के घर के बाहर मौजूद खुफिया ब्यूरो के कर्मियों को ले जाते सुरक्षाकर्मी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) के निदेशक आलोक वर्मा के जनपथ स्थित आधिकारिक आवास के बाहर गुरुवार को खुफिया ब्यूरो से जासूसी कराने का मुद्दा उछला। निदेशक आलोक वर्मा के आवास के बाहर गुरुवार सुबह संदिग्ध अवस्था में घूमते पाए गए खुफिया ब्यूरो के चार लोग पकड़े गए। मामला बढ़ने पर गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कैफियत दी कि सीबीआइ प्रमुख के आवास के बाहर भीड़ थी और हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर चारों को वहां ड्यूटी पर तैनात किया गया था। दूसरी ओर, शाम को सीबीआइ ने बयान जारी कर सफाई दी कि आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना अपने पद पर बने हुए हैं। जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग दोनों के आरोपों की जांच कर रहा है, तब तक के लिए एम नागेश्वर राव को निदेशक का काम संभालने को कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई के एक दिन पहले दोनों घटनाक्रम सामने आए हैं। सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। उन्होंने अपनी अर्जी में खुद को छुट्टी पर भेजे जाने और राव को निदेशक का प्रभार सौंपे जाने के प्रधानमंत्री के स्तर पर लिए गए फैसले को चुनौती दी है। इस फैसले को रातों-रात लागू किए जाने के तरीके का जिक्र करते हुए उन्होंने सीबीआइ की स्वायत्तता का सवाल उठाया है। मंगलवार की देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की नियुक्ति समिति से जारी आदेश के तहत, सीबीआइ में बदलाव किया गया। सुबह जांच एजंसी के निदेशक के 2, जनपथ स्थित आधिकारिक आवास सीबीआइ हाउस के बाहर चार लोग संदिग्ध रूप से घूमते पाए गए। इन चारों को वर्मा की सुरक्षा में लगे स्टाफ ने पकड़ लिया और बंगले के भीतर ले जाकर कई घंटे पूछताछ की। बाद में सभी को नई दिल्ली जिला पुलिस के हवाले कर दिया। चारों आइबी (खुफिया विभाग) के स्टाफ थे। सभी के पास से आइबी की पहचान पत्र और महत्त्ववूर्ण दस्तावेज भी मिले। आइबी के इन कर्मियों के नाम हैं- धीरज कुमार सिंह, अजय कुमार, प्रशांत कुमार और विनीत कुमार। इन लोगों ने पूछताछ में बताया कि ये लोग अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन इस घटना की खबर फैलते ही मामले ने सियासी मोड़ ले लिया। कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक पार्टियां केंद्र सरकार पर हमलावर हो गर्इं और निदेशक वर्मा की जासूसी कराने का आरोप लगाया।

इस मामले में विवाद बढ़ने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दोपहर बाद बयान जारी कर सफाई दी। गृह मंत्रालय ने कहा कि वर्मा के दो, जनपथ आवास के बाहर के उच्च सुरक्षा प्राप्त क्षेत्र में चार व्यक्ति ‘नियमित, गुप्त’ ड्यूटी पर थे। गृह मंत्रालय ने कहा कि आइबी पर उन स्थितियों की खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करने की जिम्मेदारी है, जो कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। आइबी के लोग ‘संवेदनशील क्षेत्रों’ में ‘नियमित रूप से’ तैनात किए जाते हैं। कई बार ऐसा स्थानीय कानून प्रवर्तन एजंसियों के साथ मिलकर किया जाता है और कई बार औचक तरीके से किया जाता है। नियमानुसार ड्यूटी पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी अपने पास पहचान पत्र रखते हैं, क्योंकि वे ‘नियमित ड्यूटी’ होते हैं। ये लोग बगैर किसी तामझाम के निगरानी करते हैं। इसी तरह से गुरुवार को तड़के जनपथ पर एक यूनिट रुकी, जहां लोगों का असामान्य जमावड़ा था।’ यह कार्रवाई यह पता करने के लिए थी कि क्यों लोग वहां इकट्ठा हुए थे। गृह मंत्रालय के मुताबिक, ‘यह उच्च सुरक्षा प्राप्त क्षेत्र है जहां कई उच्च सुरक्षा प्राप्त लोग रहते हैं। दुर्भाग्य से तैनात किए गए लोगों की उपस्थिति अन्य ढंग से जाहिर की गई।’

अपने पद पर बने हुए हैं आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना : सीबीआइ
सीबीआइ ने बयान जारी कर कहा कि आलोक वर्मा सीबीआइ निदेशक और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने हुए हैं। जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग इस मामले की जांच कर रहा है, तब तक एम नागेश्वर राव निदेशक का काम करेंगे। हम इस तथ्य से पूरी तरह अवगत हैं कि एजंसी की विश्वसनीयता और छवि में गिरावट से वे महत्त्वपूर्ण मामले प्रभावित होंगे, जिन्हें हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहे हैं। हम जो कुछ भी कर रहे हैं, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं कि सीबीआइ की छवि को नुकसान न पहुंचे।

अपने पद पर बने हुए हैं आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना : सीबीआइ
सीबीआइ ने बयान जारी कर कहा कि आलोक वर्मा सीबीआइ निदेशक और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने हुए हैं। जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग इस मामले की जांच कर रहा है, तब तक एम नागेश्वर राव निदेशक का काम करेंगे। हम इस तथ्य से पूरी तरह अवगत हैं कि एजंसी की विश्वसनीयता और छवि में गिरावट से वे महत्त्वपूर्ण मामले प्रभावित होंगे, जिन्हें हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहे हैं। हम जो कुछ भी कर रहे हैं, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं कि सीबीआइ की छवि को नुकसान न पहुंचे।

‘हिरासत में नहीं लिया’
नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने कहा, ‘वर्मा के आवास के बाहर से पकड़े गए चारों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया। पुलिस ने किसी को हिरासत में नहीं लिया है।’

एसआइटी जांच के लिए याचिका पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सीबीआइ अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल से कराने की मांग करने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने पर वह विचार करेगा। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारियों में जांच ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना भी शामिल हैं जिन्हें उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण के इस तर्क पर विचार किया कि भ्रष्टाचार के व्यापक मुद्दे जांच एजंसी को प्रभावित कर रहे हैं और इसलिए जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की जरूरत है। जजों ने भूषण को इस मामले में सारा विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

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