डॉ. कफील पर लगा था NSA, मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिख कहा- देश की सेवा करने का मौका दें, बाद में फिर कर दीजिएगा निलंबित

डॉ कफील खान 29 जनवरी, 2020 से ही उत्तर प्रदेश की मथुरा जेल में बंद थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कफील खान की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया था।

Corona pandemic, BRD Medical Collegeसीएम योगी आदित्यनाथ और डॉ. कफील खान। (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

2017 में यूपी के गोरखपुर में इंसेफलाइटिस बीमारी की वजह से 60 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज से निलंबित डॉक्टर कफील ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर देशहित में अपना निलंबन वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन ने भी उनके पत्र को ट्वीटर पर शेयर कर इस पर जनहित में फैसला लेने का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में डॉ. कफील ने कहा है,”वे कोरोना पीड़ित लोगों की मदद करना चाहते हैं। कहा कि उनके पास गहन चिकित्सा का 15 वर्षों का अनुभव है। यह अनुभव शायद इस वक्त लोगों की जिंदगी बचाने में काम आ सके, इसलिए मेरा निलंबन वापस लेकर मुझे फिर बहाल करें। महामारी खत्म होने के बाद मुझे फिर निलंबित कर दीजिएगा।” उन्होंने लिखा कि हाल ही में पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. राजीव मिश्रा और डॉ. सतीश कुमार का निलंबन वापस लेकर उन्हें बहाल कर दिया गया है, लेकिन मुझे नहीं किया जा रहा है। उनके मुताबिक इसको लेकर उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को 36 से ज्यादा पत्र लिख चुके हैं।

निलंबन के बाद पिछले साल दिसंबर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित भड़काऊ भाषण के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत डॉ. कफील खान हिरासत में ले लिया गया था। बाद में उन्हें हाई कोर्ट के आदेश पर रिहा किया गया था। हालांकि उनका निलंबन अब भी जारी है।

डॉ कफील खान 29 जनवरी, 2020 से ही उत्तर प्रदेश की मथुरा जेल में बंद थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कफील खान की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया था।

उन पर रासुका (NSA) के तहत मामला दर्ज करने के सरकार के फैसले के खिलाफ डॉ. कफील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि डॉ. कफील की हाईकोर्ट में पेंडिंग याचिका पर 15 दिन के भीतर सुनवाई की जाए।

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