ताज़ा खबर
 

नोएडा में बिना एनओसी दर्जनों कारखाने

अधिकांश बगैर अग्निशमन प्रबंध के चलने वाले बैंक्वेट हॉल में शादी- समारोह आयोजित हो रहे हैं। जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और बच्चे आपतकालीन खतरे की परवाह किए बगैर ठहरते हैं।

इमारतों में आग लगने से दर्जनों लोगों जान गंवा चुके हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आशीष दुबे

राष्ट्रीय राजधानी के एक कारखाना में लगी आग से 43 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है लेकिन ऐसा या इससे भी बड़ा हादसा कभी भी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक महानगर नोएडा में हो सकता है। यहां पहले भी कारखाने, अतिथि गृह, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल और गांव में खड़ी बहुमंजिला इमारतों में आग लगने से दर्जनों लोगों जान गंवा चुके हैं। दमकल विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र के बगैर कारखाने में सैकड़ों मजदूर काम करते हैं, वहीं सस्ते किराए के लालच में लोग जान हथेली पर रखकर अतिथि गृह तक में रुकते हैं। आलम यह है कि बगैर एनओसी के यहां चल रहे अस्पतालों में बड़ी संख्या में लोगों का इलाज होता है। अधिकांश बगैर अग्निशमन प्रबंध के चलने वाले बैंक्वेट हॉल में शादी- समारोह आयोजित हो रहे हैं। जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और बच्चे आपतकालीन खतरे की परवाह किए बगैर ठहरते हैं।

अग्निशमन से जुड़े जानकार बताते हैं नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सैकड़ों की संख्या में बगैर एनओसी के कारखाने, अतिथि गृह, बैंक्वेट हॉल, अस्पताल, ओयो रूम और गांवों में असंख्य बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं। अलबत्ता बगैर एनओसी के चल रहे इन संस्थानों के बारे में अग्निशमन व पुलिस विभाग को जानकारी है, तब भी वे कैसे चल रहे हैं, इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है। जिन भी अस्पताल या इमारतों में आग लगने की घटनाएं हुई हैं, जांच में उनके पास दमकल विभाग की एनओसी नहीं मिली है, या उसकी वैधता की समयसीमा खत्म हो चुकी है। तर्क है कि नियमों को ताक पर बनाई गई इमारतों को दमकल विभाग एनओसी नहीं देता है। जबकि अग्निशमन अधिकारियों के मुताबिक उनके पास कोई ऐसा विशेषज्ञ दस्ता नहीं है, जो ऐसी इमारतों की जांच कर सके। इमारतों को एनओसी देने से पहले उनकी जांच की जाती है, जांच में इंतजाम पूरे मिलने पर ही एनओसी दी जाती है। गौतम बुद्ध नगर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके सिंह के मुताबिक बगैर एनओसी के प्रतिष्ठान संचालित करने पर कई लोगों को जेल भी भेजा गया है लेकिन ऐसे लोग मान नहीं रहे हैं। अब ज्यादा सख्ती कर बगैर एनओसी के संचालित होने वाले प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

एनओसी के खेल में एफएसओ और ठेकेदार हो चुके हैं गिरफ्तार
अग्निशमन प्रबंधों को लेकर दिखावा कर एनओसी हासिल करने के खेल के आरोप शहर में काफी पहले से लगते रहे हैं। आरोप है कि अग्नि सुरक्षा को लेकर बिल्डर, उद्योगपति, व्यापारी मनमानी करते हैं। मानकों के उल्लंघन के बावजूद इन्हें अग्निशमन विभाग से एनओसी मिल रही है। रिश्वत लेकर एनओसी देने और विभाग पर आग बुझाने वाले उपकरण बनाने वाली एजेंसियों व ठेकेदार से साठगांठ करने के भी आरोप लगते रहे हैं। निजी आवेदकों को जबरन उन्हीं एजेंसियों के यहां से उपकरण लगवाने का दबाव बनाया जाता है। इन आरोपों की तक पुष्टि भी हो गई, जब एसएसपी वैभव कृष्ण ने दमकल का काम करने वाले एक निजी ठेकेदार औरर अग्निशमन अधिकारी कुुलदीप कुमार की मिली भगत से आॅन लाइन एनओसी देने पर दोनों को गिरफ्तार किया गया था। 13 अन्य निजी दमकल ठेकेदारों पर मामले दर्ज किए गए थे।

 

Next Stories
ये पढ़ा क्या?
X