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करीब चार साल दबी रही नीतीश के करीबी पूर्व शिक्षा मंत्री के घोटाले की फ़ाइल, दो पर हो गया जल्द ऐक्शन

बिहार में नीतीश सरकार के सत्ता में आने के बाद शिक्षा मंत्री की शपथ लेने वाले मेवालाल चौधरी को बीएयू में कुलपति रहते हुए लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते ही इस्तीफा देना पड़ा था।

बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने खुद मानी थी नियुक्ति में गड़बड़ी की बात। (file)

बिहार की नीतीश सरकार में शिक्षा मंत्री बनाए गए मेवालाल चौधरी को अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। अब उनके खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। सामने आया है कि बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) नियुक्ति घोटाले में भागलपुर पुलिस ने तत्कालीन कुलपति और सह पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी को लंबे समय तक बचाए रखा। पुलिस ने इसके लिए अभियोजन स्वीकृति आदेश प्राप्त करने से जुड़ी फाइल पौने चार साल तक दबाए रखी। जबकि इसी मामले में दो अन्य आरोपियों पर पुलिस ने छह महीने के अंदर ही अभियोजन चलाने से लेकर चार्जशीट तक फाइल कर दी।

अब एक ही केस में पुलिस की दो तरह की कार्रवाई से सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 अक्टूबर को पहली बार एसएसपी आशीष भारती नेकेस के जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे मेवालाल समेत अन्य आरोपियों पर अभियोजन चलाने के लिए आदेश हासिल करें। बता दें कि मेवालाल पर फरवरी 2017 में सबौर थाने में नियुक्ति घोटाले के आरोपों में केस दर्ज कराया गया था। पुलिस की जांच में यह मामला सही पाया गया, पर चार्जशीट फाइल करने के लिए जरूरी अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव ही पुलिस ने नहीं दिया था। अब एसएसपी के आदेश के बाद बीएयू ने राजभवन को लिखा है।

फिलहाल इस मामले में राजभवन की ओर से कोई आदेश नहीं आया है। हालांकि, बीते पौने चार सालों में इस केस की फाइल तैयार होने के बावजूद दो एसएसपी और तीन जांच अधिकारियों ने अपनी तरफ से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई। अब एसएसपी आशीष भारती ने जांच अधिकारी डीएसपी मुख्यालय सुनील कुमार को आदेश दिया है कि वे मेवालाल, उनके भतीजे रमेश चौधरी और बीएयू के तत्कालीन निदेशक मुकेश कुमार बाधवानी पर अभियोजन चलाने के लिए जरूरी स्वीकृति हासिल करें। बता दें कि मेवालाल इस मामले में केस दर्ज होने के छह महीने बाद (सितंबर 2017) और मुकेश एक साल बाद हाईकोर्ट में सरेंडर कर जमानत ले चुके हैं।

मामले में दो अन्य आरोपी बीएयू के तत्कालीन प्रभारी पदाधिकारी आरबी वर्मा और तत्कालीन सहायक निदेशक (नियुक्ति) अमित कुमार पर अभियोजन चलाने के लिए पुलिस ने बीएयू से 27 जून 2017 को ही अभियोजन स्वीकृति आदेश प्राप्त कर लिया था। दोनों पर 10 अगस्त 2017 को ही चार्जशीट भी फाइल कर दी गई थी। यानी छह महीने में ही पुलिस ने सारी कार्यवाही पूरी कर चार्जशीट फाइल करने की सारी प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी। लेकिन घोटाले से जुड़े सबसे अहम कड़ी तत्कालीन कुलपति मेवालाल चौधरी के मामले में पुलिस ने अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव देने में पौने चार साल लगा दिए।

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