उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले उन्नयन भाटी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट कॉलेज में दाखिला लिया। 18 वर्षीय उन्नयन ने साउथ कैंपस के नजदीक छात्रों के बीच मशहूर इलाके सत्य निकेतन में अस्थायी तौर पर कमरा लिया था।
लेकिन वह सत्य निकेतन से से भी दूसरी जगह शिफ्ट होना चाहता था। उसने बताया, ”किराया बहुत ज्यादा था। बिजली के दाम भी काफी अधिक 15 रुपये प्रति यूनिट थे।” उसने नया घर तलाशने में पूरा एक महीना लगा दिया।
रविवार को उसे एक ब्रोकर का फोन आया। दोपहर करीब 1:30 बजे वह ब्रोकर के साथ एक हॉस्टल देखने जा रहा था। तभी दोनों ने अचानक झटके महसूस किए। उनके सामने ‘हॉस्टल डेज’ के नाम की पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। इस हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है। उन्नयन और ब्रोकर ने तुरंत स्कूटर से छलांग लगा दी। उन्नयन ने कहा, ”अगर हम थोड़े और करीब होते तो इमारत हम पर ही गिर जाती।”
इस हादसे में बाल-बाल बचने के लिए उन्नयन खुद को भाग्यशाली मानते है। सोमवार को उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी इमारत गिरने के पीड़ितों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग कर रहे थे।
इस घटना के बाद उसके माता-पिता उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। भाटी की योजना अब कुछ दिनों के लिए अपने घर वापस जाने की है। वह कहते हैं, ”मैं अब निश्चित तौर पर सत्य निकेतन में नहीं रहूंगा।” हालांकि, वह अपने मौजूदा आवास के लिए एक महीने के किराए और सिक्यॉरिटी डिपॉजिट के तौर पर पहले ही 28000 रुपये दे चुके हैं।
खाली हो रहा सत्य निकेतन
इलाके में और उसके आसपास रहने वाले ज्यादातर छात्र अब अपना सामान समेट रहे हैं। कुछ अपने घर जा रहे हैं जबकि कुछ फिलहाल दोस्तों या रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। ‘हॉस्टल डेज’ के ठीक बगल की इमारतों को खाली करा दिया गया है। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने छात्रों से संपर्क कर उन्हें अस्थायी आवास उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली 18 वर्षीय एक छात्रा जो एक साल तक ‘हॉस्टल डेज’ में रही थी। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह पांच मंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर डबल-शेयरिंग कमरे के लिए हर महीने 17000 रुपये किराया देती थी।
उसने कहा, ”बारिश का पानी हमारे कमरे में रिसकर आता था। उन्होंने हमें छत वाले कमरे में शिफ्ट करने का वादा किया था लेकिन कभी शिफ्ट नहीं किया। खाना भी अच्छा नहीं था… इसलिए मैंने हॉस्टल छोड़ दिया।” उसने बताया कि जून में हॉस्टल छोड़ने के बाद से वह लगातार मकान मालिकों से अपनी सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम वापस मांग रही है।
अब वह हादसे वाली जगह के सामने स्थित एक इमारत में रह रही है। उसका कहना है कि उसके पास घर वापस जाने तक के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं।
एक अन्य छात्रा- 19 वर्षीय ईशा बिस्वास सोमवार को अपने रूममेट्स के साथ इमारत गिरने की जगह पर चल रहे बचाव अभियान को देख रही थी। उसने इशारा करते हुए कहा, ”मैं पहले वहां रहती थी।”
कमरे का किराया लगातार बढ़ने के कारण उसने ‘हॉस्टल डेज’ छोड़ दिया था। फिलहाल वह सत्य निकेतन की चौथई गली मे बने एक पीजी में रह रही है। हालांकि, वह इस इलाके को छोड़ना नहीं चाहती क्योंकि उसके कोर्स का ब सिर्फ एक साल ही बचा है। ईशा ने बताया कि वह अपने चार मंजिला पीजी के मालिकों से बात करेगी और उम्मीद है कि वे उसकी चिंताओं का समाधान करेंगे।
अपने फैसले पर दोबारा सोचने को मजबूर
मैत्रेयी कॉलेज की छात्रा कनिष्का मौर्य ने कॉलज के हॉस्टल की जगह सत्य निकेतन में पीजी को चुना था। कॉलेज के हॉस्टल की सालाना फीस 180000 रुपये थी जबकि इसके साथ 90000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट भी देनी होती थी।
उन्होंने कहा, ”हॉस्टल में रहने के लिए कुछ मानदंड हैं। पहली प्राथमिकता मेरिट के आधार पर होती है, दूसरी दूरी के आधार पर और सीटें भी कोर्स के हिसाब से सीमित होती हैं।” अब वह अपने इस फैसले पर दोबारा विचार कर रही हैं।
इमारत गिरने से ठीक एक दिन पहले शनिवार को राजस्थान की रहने वाली प्रिया चौधरी सत्य निकेतन स्थित ‘स्टूडेंट हब’ पीजी में रहने आई थीं। अब वह आगे क्या करेंगी, इसे लेकर असमंजस में हैं।
आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज की छात्रा 19 वर्षीय आस्था कुमारी हादसे के वक्त अपने पीजी हॉस्टल में दोपहर का खाना खा रही थीं, तभी बिजली चली गई। उन्होंने कहा, ”यह मुझे असामान्य नहीं लगा क्योंकि यहां बिजली कटौती अक्सर होती रहती है। लेकिन फिर मैंने लोगों को चिल्लाते हुए सुना तो मैं यह देखने के लिए बाहर भागी कि आखिर क्या हुआ है।”
उन्होंने आगे बताया, ”मैं कुछ देर बाहर ही रही क्योंकि हमारी वार्डन ने व्हाट्सऐप ग्रुप पर मैसेज करके ऐसा करने के लिए कहा था।” आस्था ‘हॉस्टल डेज’ से दो गली दूर रहती हैं।
उन्होंने हादसे के बाद के भयावह मंजर को याद करते हुए कहा, ”यह बेहद डरावना था। मैंने मलबे से पांच लोगों को बाहर ले जाते हुए देखा।”
कुमारी अब बस इस इलाके से दूर जाना चाहती हैं लेकिन आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती। उन्होंने कहा, ”मेरे माता-पिता दोबारा सिक्योरिटी डिपॉजिट या इस महीने का वह किराया नहीं दे सकते जो मैं पहले ही चुका चुकी हूं। अगर मुझे ये पैसे वापस नहीं मिले तो मुझे लगता है कि मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ सकती है।”
हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, महेश को 2 दिन की पुलिस कस्टडी
दिल्ली के सत्य निकेतन इमारत गिरने के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने गिरफ्तार आरोपी हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता 14 दिन की हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं आरोपी बेटे महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
