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भदोही के कालीन का जर्मनी के डोमोटेक्स मेले में जलवा, 2014 और 2017 में भी भारतीय कलाकारी को मिला था अवॉर्ड

फ्लोर कवरिंग में विश्व का सबसे बड़ा चार दिवसीय डोमोटेक्स मेला आज जर्मनी के हनोवर शहर में शुरू हो गया। पूर्व में आयोजित मेले में भारतीय कालीन डिजाइनों का दबदबा रहा है। भदोही की कालीन डिजाइन ने जर्मनी में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी थी।

प्रदर्शनी के लिए रखे गए कालीन फोटो सोर्स- डेमोटेक्स/ट्विटर

फ्लोर कवरिंग में विश्व का सबसे बड़ा चार दिवसीय डोमोटेक्स मेला आज जर्मनी के हनोवर शहर में शुरू हो गया। भारत से करीब 400 कालीन निर्यातक यहां पहुंचे है जो इस मेले में अपनी कालीन का प्रदर्शन करेंगे। इस वर्ष फाइनल दौर के लिए चयनित 24 डिजाइनों में से भारत की चार कालीन डिजाइनें भी है। जिनको लेकर भारतीय कालीन निर्यातकों की नजरें डोमोटेक्स मेले पर टिकी हैं। पूर्व में आयोजित मेले में भारतीय कालीन डिजाइनों का दबदबा रहा है। उत्तर प्रदेश के भदोही की कालीन डिजाइन ने जर्मनी  में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी थी।

क्या है डोमोटेक्स मेला- फ्लोर कवरिंग में डोमोटेक्स मेले को विश्व का सबसे बड़ा कालीन मेला माना जाता है। इसमें प्रत्येक वर्ष भारत के सैकड़ों कालीन निर्यातक भाग लेते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा निर्यातक भदोही कालीन परिक्षेत्र के होते हैं। इस मेले में सैकड़ों देशों के प्रतिनिधि भाग लेते है। 1989 में जर्मनी के हनोवर शहर में पहली बार डेमोटेक्स मेला शुरू किया गया था। इस मेले में हस्तनिर्मित कालीनों के निर्माता भाग लेते है। इसके माध्यम से नए उत्पाद, अत्याधुनिक भू-तल सामग्री, आधुनिक डिजाइन, फैशन के साथ मिश्रित परंपरा का प्रदर्शन किया जाता है। डेमोटेक्स की अंतरराष्ट्रीय कालीन और फर्श उद्योग में अपनी प्रतिष्ठा स्थापित है।

भारत के कालीन निर्यातक भी है शामिल- जर्मनी में हो रहे डोमोटेक्स मेले में करीब 200 कालीन निर्यातक भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी आदि कालीन परिक्षेत्र से पहुंचे हैं। भारत की तरफ से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) मेले में भारतीय पवेलियन की व्यवस्था करती हैं, जिसके माध्यम से इस वर्ष 160 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। बाकी के प्रत्याशी स्वतंत्र रूप हिस्सा ले रहे हैं।

भारत की कालीन डिजाइनें भी शामिल- मेले के आयोजकों द्वारा प्रत्येक वर्ष आठ श्रेणियों में बेस्ट डिजाइन अवार्ड दिए जाते हैं। गौरतलब है कि कड़े मुकाबले में बेस्ट डिजाइन अवार्ड के लिए 165 देशों से आये 233 कालीन डिजाइनों में से 24 को फाइनल दौर के लिए चयनित किया गया है। जिसमें भारत की चार डिजाइनें शामिल है।

बता दें कि इसके पहले हुए डोमोटेक्स मेले उत्तर प्रदेश के भदोही की कालीन डिजाइनों का दबदबा रहा है। साल 2014 में जहां गोपीगंज के संजय गुप्ता के डिजाइन ने अवार्ड जीता तो वर्ष 2017 में नईबाजार के नुमान वजीरी के डिजाइन ने डोमोटेक्स में वाहवाही लूटी थी। संजय गुप्ता ने बताया कि डोमोटेक्स में भारतीय कालीनों की मांग अधिक रहती है।

बता दें कि डेमोटेक्स मेले से निर्यातकों को काफी उम्मीद है। निर्यातकों के अनुसार जैसे हाल ही में वाराणसी में आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो-2014 में विदेशी ग्राहकों की आमद हुई थी, उसी तरह डोमोटेक्स के परिणाम भी सुखद होने की उम्मीद है। इसलिए निर्यातकों ने अलग-अलग तरीको के सैंपल तैयार कराए हैं। बता दें कि इस बार मेले में बड़ी संख्या में भारतीय निर्यातक स्वतंत्र रूप से भी हिस्सा ले रहे हैं। परिषद के प्रशासनिक समिति के सदस्य उमेश कुमार गुप्ता के अनुसार इस मेले के लिए लोगों ने कड़ी मेहनत की हैं। उन्होंने बताया कि मेले में शामिल होने से प्रतिभागी को तीन से छह महीने का काम मिल जाता है। इसलिए वो मेले में भाग लेने का मौका नहीं चूकना चाहते।

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