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परिवार की चिंता में 9 डॉक्‍टरों ने छोड़ी नौकरी, हॉस्‍पिटल को कोरोना से लड़ाई के दौरान ही करनी पड़ी नई भर्तियां

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना के डर से पीड़ितों का इलाज करने वाले एक वर्ग पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोनावायरस का डर अब आम लोगों के साथ डॉक्टरों में भी फैल रहा है। (प्रतीकात्मक फोटो)

पश्चिम बंगाल में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल राज्य में कोरोना के 10 हजार से ज्यादा मरीज पाए गए हैं, जबकि 451 लोगों की जान जा चुकी है, जो कि राष्ट्रीय औसत के हिसाब से गुजरात के बाद सबसे ज्यादा है। इस बीच कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में 9 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। बताया गया है कि डॉक्टरों ने साथ रहने वाले अपने बुजुर्ग परिवारवालों की सुरक्षा के मद्देजनर यह फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, डॉक्टरों को डर था कि उनके लगातार कोविड-19 मरीजों के संपर्क में रहने की वजह से घर में रहने वाले बुजुर्गों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।

जिस केपीसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से इन डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया। उसे कोरोना काल के दौरान ही नई भर्तियां निकाल कर मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति करनी पड़ी। हॉस्पिटल के सीईओ जयदीप मित्रा ने बताया- “ऑब्सटेट्रिक और गाायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट के कुछ डॉक्टरों को डर था कि कोरोना मरीजों के संपर्क में आने से वे भी संक्रमित हो जाएंगे। उनके घर में बुजुर्ग लोग हैं। हमने इस मुद्दे को तुरंत नए डॉक्टरों की भर्ती कर के सुलझा दिया है। हालांकि, जिन डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया, वे अलग-अलग आयु वर्ग के थे, न कि ज्यादा उम्र के।”

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पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोलकाता के कुछ अस्पतालों में प्रेग्नेंट महिलाओं के कोरोना से संक्रमित मिलने के बाद गायनेकोलॉजिस्ट्स में डर फैल गया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ हफ्तों पहले ही जिन डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया था, उन्होंने अस्पताल से सफाई मांगी थी कि जिन मरीजों की उन्होंने जांच की उनमें से कोई कोरोना पॉजिटिव तो नहीं था।

अकेले कोलकाता के केपीसी अस्पताल में ही नहीं, बल्कि यहां के AMRI हॉस्पिटल में भी कई उम्रदराज डॉक्टरों ने 5-6 मरीजों से ज्यादा को देखने से मना कर दिया है। AMRI हॉस्पिटल के सीईओ के मुताबिक, अब सिर्फ कुछ ही मरीज अस्पताल आ रहे हैं, ऐसे में उन्हें भी लौटा देना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के डर से पीड़ितों का इलाज करने वाले एक वर्ग पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

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