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इलाज के अभाव में गई बेटे की जान तो डॉक्‍टर को मार दी गोली

डॉ. सिंह को गोली मारने के दौरान एक हत्यारे ने ‘बॉस आज भी तो छुट्टी का दिन है आज कैसे मरीज देख रहे हैं’ कहा था। पुलिस ने इसी बात को केंद्र में रख कर जांच शुरू की।

Author ऊधमसिंह नगर | April 23, 2016 11:32 AM
ऊधमसिंह नगर में अपने बीमार बच्चे को नहीं देखने और उसकी मौत होने पर गुस्साए एक आदमी ने अपने साले के साथ मिलकर एक डॉक्टर की हत्या कर दी। ( representative picture)

ऊधमसिंह नगर में अपने बीमार बच्चे को नहीं देखने और उसकी मौत होने पर गुस्साए एक आदमी ने अपने साले के साथ मिलकर एक डॉक्टर की हत्या कर दी। पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए दोनों हत्यारोपियों को बिजनौर से गिरफ्तार कर लिया है। 20 अप्रैल को बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह की क्लिनिक में घुस कर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया था। आईएमए और सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी थीं। डीआईजी और एसएसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण कर घटना के खुलासे को 10 सदस्यीय टीम का गठन किया था।

पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला डॉ. सिंह को गोली मारने के दौरान एक हत्यारे ने ‘बॉस आज भी तो छुट्टी का दिन है आज कैसे मरीज देख रहे हैं’ कहा था। पुलिस ने इसी बात को केंद्र में रख कर जांच शुरू की। पुलिस को शक था कि कहीं डॉक्टर द्वारा मरीज को नहीं देखने से तो यह मामले नहीं जुड़ा हुआ। इसके बाद पुलिस ने ओपीडी में मरीजों के और घर पर देखे जाने वाले मरीजों के रिकार्ड को खंगाला। रिकार्ड से पुलिस को पता चला कि 17 अप्रैल को डॉ. सिंह द्वारा मानिक राठी के बेटे को देखा गया था जिसकी 19 अप्रैल को मौत हो गई थी। पुलिस ने जब मानक राठी की तलाश की तो पता चला कि वो अपनी पत्नी के साथ फरार है। बाद में पुलिस ने मानक और हत्या में शामिल उसके साले को बिजनौर से गिरफ्तार कर लिया।

हत्यारोपी मानिक ने पुलिस से अपना गुनाह कबूलते हुए कहा कि उसका बेटा बेटा भव्वी राठी 3 मार्च 2016 को किलकारी नर्सिंग होम जसपुर में पैदा हुआ था। बच्चे की तबीयत अचानक 17 अप्रैल को खराब हो गई। उसके इलाज के लिए वह उसे डॉ. एसके सिंह के पास लाया था। डॉ. सिंह ने दवा देकर घर भेज दिया। फिर 18 अप्रैल रात को अचानक फिर बच्चे की तबियत खराब हुई तो वह डॉक्टर के पास आया। उसने डॉक्टर से मदद मांगी लेकिन डॉ सिंह घर से बाहर नहीं निकले उसने कई बार विनती की पर उसके बच्चे को डॉक्टर ने नहीं देखा।

जब वह बच्चे को दूसरे हॉस्पिटल ले गया तो वहां उस डॉक्टर नहीं मिले। इसी बीच 19 अप्रैल को तड़के बच्चे की मौत हो गई। अपने बच्चे की मौत से दुखी मानिक ने डॉ से बदला लेने की ठान ली और बाद में अपने साले के साथ मिलकर हत्या कर दी। घटना के खुलासे पर डीजीपी ने 20 हजार, डीआईजी ने 5 हजार, एसएसपी ने ढाई हजार, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने 11 हजार और देवभूमि मीडिया क्लब ने 15 सौ रुपये ईनाम देने की घोषणा की।

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