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फीकी रही इस बार की दीपावली

इस बार दिल्ली की दिवाली फीकी और प्रदूषण भरी रही। कारोबारियों ने फीकी रही दिवाली के लिए डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट को जम्मेदार ठहराया। बाजारों में भीड़ की मौजूदगी पर उन्होंने कहा-भीड़ दिखी लेकिन खरीदारी नहीं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (Photo by Ritesh Shukla)

इस बार दिल्ली की दिवाली फीकी और प्रदूषण भरी रही। कारोबारियों ने फीकी रही दिवाली के लिए डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट को जम्मेदार ठहराया। बाजारों में भीड़ की मौजूदगी पर उन्होंने कहा-भीड़ दिखी लेकिन खरीदारी नहीं। इस बार ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता में काफी गिरावट आई है। इसकी पुष्टि ग्राहकों ने भी की और बताया कि इस दिवाली पर घर को रोशन करना महंगा पड़ा। उधर, दिवाली के एक दिन बाद गुरुवार की सुबह दिल्ली वालों ने पार्कों से लेकर सड़कों तक से परहेज किया। गुरुवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 574 रहा जो अत्यंत गंभीर आपात श्रेणी के अंतर्गत आता है। प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी बहस का केंद्र बनी। कुछ लोगों ने तो दिवाली पर पटाखे जलाने के खिलाफ कानून बनाने या अध्यादेश लाने तक की मांग की।

कंफेडेरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक, इस बार कारोबार में गिरावट दर्ज हुई। कैट ने इस साल 40 फीसद कम कारोबार का दावा किया है और इसके लिए मंहगाई और आॅनलाइन खरीदारी को जिम्मेदार ठहराया है। खंडेलवाल ने कहा-बहुराष्ट्रीय आॅनलाइन मार्केटिंग कंपनियों ने खुदरा विक्रेताओं को तगड़ी चोट पहुंचाई है। जबकि भागीरथ पैलेस के लाइटिंग कारोबारी राकेश सैनी का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट से स्थिति खराब हुई। लंबी लड़ी और झालरों का कारोबारा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। क्योंकि ये पूरी तरह आयातीत होते हैं। दूसरी ओर बहुत से कच्चा माल पर भी शुल्क बढ़ने के कारण घरेलू उद्योगों ने भी सामान के दाम बढ़ा दिए। ई-कॉमर्स कंपनियों ने कई देसी ब्रांड के साथ समझौता कर बड़ी छूट देने की पेशकश की है।

बता दें कि भागीरथ पैलेस में लाइटिंग कारोबार के 4000 से ज्यादा व्यापारी हैं और सालाना कारोबार 1500 करोड़ से ज्यादा का है। कालकाजी मार्केट में लड़ियों के कारोबारी मोहन बिष्ट ने कहा- इस समय चीनी एलइडी लाइटों पर सीमा शुल्क दोगना है, जबकि सेस और अन्य शुल्क के साथ आयात शुल्क कम से कम दोगुना बढ़ा है। उस पर से रुपया डॉलर के मुकाबले गिर चुका है। इस वजह से चीन से बहुत कम माल आया है और जो आए वे मंहगे हो गए।

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