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बिहार चुनाव में हार के बाद पार्टी में फिर उठी असंतोष की चिंगारी, गांधी परिवार पर उठ रहे सवाल

बिहार कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि पार्टी ने गलत टिकट बंटवारा किया। साथ ही AIMIM फैक्टर और आखिरी फेज में वोटों के ध्रुवीकरण की वजह से उन्हें नुकसान हुआ।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र पटना | Updated: November 12, 2020 11:08 AM
Bihar Election 2020, Sonia Gandhi, Congressबिहार चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन महागठबंधन की साथी पार्टियों में सबसे खराब रहा है। (एक्सप्रेस फोटो)

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। महागठबंधन में 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही यह पार्टी महज 19 सीट ही जीत पाई। अब राज्य में इस खराब प्रदर्शन पर कांग्रेस के अंदरखानों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कई वरिष्ठ नेताओं ने तो पार्टी की सीटों में गिरावट के लिए गांधी परिवार तक पर निशाना साधा। ऐसे ही एक असंतुष्ट नेताओं के गुट का कहना है कि कांग्रेस की वजह से महागठबंधन की साथी पार्टी- राजद और लेफ्ट पार्टियां भी नीचे आ गईं।

बता दें कि महागठबंधन ने कुल 110 सीटें जीती हैं। इनमें 144 सीटों पर राजद लड़ी थी और तेजस्वी के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने अपने दम पर ही 75 सीटों पर जीत हासिल की। इतना ही नहीं 19 सीटों पर लड़ी CPI-ML ने भी 12 सीटों पर जीत हासिल की। यानी कांग्रेस के सीट जीतने का औसत महागठबंधन की पार्टियों में सबसे कम रहा।

बिहार कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि पार्टी ने गलत टिकट बंटवारा किया। साथ ही AIMIM फैक्टर और आखिरी फेज में वोटों के ध्रुवीकरण की वजह से उन्हें नुकसान हुआ। अन्य नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को 13 ऐसी सीटें मिली थीं, जिन पर उसने कभी चुनाव नहीं लड़ा। मतदान के पहले दो फेजों में पार्टी का प्रदर्शन काफी बेहतर था। कांग्रेस ने 26 ऐसी सीटों पर भी चुनाव लड़ा, जिन पर पिछले तीन दशक में महागठबंधन का कोई भी साथी चुनाव नहीं जीता था।

वहीं, कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं ने पार्टी के कुप्रबंधन को चुनाव में हार का कारण करार दिया। कई नेताओं का कहना है कि उन्हें पार्टी के चुनाव अभियान से ही दूर रखा गया और नई दिल्ली से कुछ अयोग्य नेताओं को बिहार में कार्यभार संभालने भेजा गया। इसके चलते बिहार में बैठे कांग्रेस के नेताओं को ही नजरअंदाज कर दिया गया।

दूसरे नेताओं का कहना है कि बिहार चुनाव को अलग से देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस का यही हाल हुआ है। मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के उपचुनाव इसका उदाहरण रहे। बिहार में एकमात्र वरिष्ठ नेता जिसने प्रचार अभियान में हिस्सा लिया, वह थे राहुल गांधी। लेकिन उन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले ही जारी रखे, जबकि महागठबंधन के बाकी नेता राज्य में बेरोजगारी और नीतीश सरकार के शासन पर सवाल उठा रहे थे।

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