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दिल्ली मेरी दिल्ली: महामारी में बदल गई दिल्ली

कोरोनारोधी टीकाकरण के लिए दिल्ली सरकार ने उम्दा स्कूलों में केंद्र बनाकर एक तीर से कई निशाना साधा है। दरअसल पार्टी के चाणक्यों को पता है कि इस बहाने ज्यादातर दिल्ली वाले किसी न किसी केंद्र पर पहुंचेंगे ही। बस क्या, इसी बहाने दिल्ली सरकार की ओर से स्कूलों के आधारभूत विकास को लेकर किए गए कामों से भी यहां पहुंचने वालों को रू-ब-रू क्यों न कराया जाए।

नई दिल्ली | May 17, 2021 2:04 AM
कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली में दिखा बदलाव।

वाहवाही की सजा
दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमडेसिविर इंजेक्शन की बरामदगी जहां इन दिनों पुलिस के लिए वाहवाही का कारण बनी हुई है वहीं, इससे उनकी मुसीबत भी खासी बढ़ी है। दरअसल, हर जिले में, प्रत्येक इकाई के अलावा, अपराध शाखा और साइबर टीम भी इस अपराध पर गौर कर रही है। कई गिरोह का भंडाफोड़ किया गया, दर्जनों गिरफ़्त में आए। बेदिल ने दिल्ली पुलिस के एक आला अधिकारी से इस मामले पर बात की तो वे बेचारे हंसी रोक नहीं पाए। बोले कि ये जमाखोरी और कालाबाजारी हमारे लिए आफत लेकर आई है। जितना कम समय गिरोह के खुलासे और जब्ती में लग रहा है उससे ज्यादा समय कोर्ट में जवाब देते लग रहा है। एक तरह से वाहवाही की सजा हो गई ये तो।

जाने की बेला
दिल्ली के तीनों निगमों के महापौर का चुनावी साल में दोबारा सत्तासीन होना मुश्किल लग रहा है। बेदिल को उड़ती-उड़ती खबर मिली की पार्टी आलाकमान ने तय कर लिया है कि तीनों को चलता करने में ही फायदा है। कारण बताया जा रहा है कि कोरोना काल में तीनों महापौर की छवि सिवाय दिल्ली सरकार से निगम का फंड जारी करने के मांग तक सीमित हो गया है। जनता, काम नहीं होने से वहीं निगम कर्मचारी वेतन नही मिलने से परेशान हैं। इससे आने वाले चुनाव में बड़ा धक्का लग सकता है। इससे अच्छा है कि क्यूं ना दूसरे पार्षद को मौका देकर निगम के आने वाले चुनाव में उन्हें जी जान से लगाया जाए और एक बार फिर जीत का सेहरा पार्टी को दिलाया जा सकता है।

खजूर पर लटके
कोरोना बीमारी से संबंधित जरूरी इंजेक्शन, दवाओं, ऑक्सीजन सांद्रक आदि की कालाबाजारी में जुटे लोगों को पकड़ने में भले ही नोएडा पुलिस आयुक्त कार्यालय और जिला प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन यह सामान अब भी आम लोगों की पहुंच से दूर है। नोएडा में यह स्थिति बिल्कुल आसमान से गिरे खजूर पर लटके जैसी बन गई है। तीमारदारों को यह सामग्री किसी भी सरकारी केंद्र पर नहीं मिल रही और चोरी छिपे बेचने वालों पर पुलिस की नजर टेढ़ी है। अब मरीज की जान बचाने के लिए लोग परेशान हंै। वहीं, जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की तरफ से मदद के लिए शुरू किए गए हेल्पलाइन नंबर केवल इंतजार करने की सांत्वना देने का काम कर रहे थे। सामान उपलब्ध नहीं होने पर क्या करें, इसे कोई नहीं बता रहा था। ऐसे में तीमारदार उनका भला मान रहे हैं जिन्होंने कालाबाजारी करके दवा उपलब्ध कराई और मरीज की जान बची।

‘आप’ का काम
कोरोनारोधी टीकाकरण के लिए दिल्ली सरकार ने उम्दा स्कूलों में केंद्र बनाकर एक तीर से कई निशाना साधा है। दरअसल पार्टी के चाणक्यों को पता है कि इस बहाने ज्यादातर दिल्ली वाले किसी न किसी केंद्र पर पहुंचेंगे ही। बस क्या, इसी बहाने दिल्ली सरकार की ओर से स्कूलों के आधारभूत विकास को लेकर किए गए कामों से भी यहां पहुंचने वालों को रू-ब-रू क्यों न कराया जाए। हुआ भी यही, टीका के बहाने दिल्ली के वे लोग भी स्कूलों में जा रहे हैं जिनका स्कूलों के प्रांगण से कुछ लेना देना अब नहीं रहा है या जिनके बच्चे अब बड़े हो चुके हैं। चुंकि टीका का पंजीकरण आनलाइन है और सबकोएक तय समय पर ही बुलाया जा रहा है लिहाजा भीड़ भी नहीं है। लोग टीके का सहज आनंद उठा रहे हैं।

साथ ही प्रागंण से निकलते वक्त स्कूल के प्रांगण, बाग बगीजा, स्लोगन-पेटिंग, सूचना पट्ट पर लगे छात्रों की कला चित्रकारी, सरकार की ओर से लगाए स्कूलों के बोर्ड रिजल्ट, प्रतीभावान छात्रों के स्कूल की ओर से लगाए गए फोटो की चर्चा भी आंगतुक करते नजर आ रहे हैं। किसी ने ठीक ही कहा, आप की सरकार है, उन्हें पता है कि ‘आम के आम और गुठली के दाम’ कैसे निकालते हैं। तभी तो इधर-उधर के कई सेंटर बंदकर उन्होंने स्कूल को ही टीके का ठिकाना बनाकर कई को ठिकाने लगा दिया। आप ने एक तीर से दो शिकार कर डाले!

जनता के लिए
कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर इन दिनों सांसद, विधायक और निगम पार्षदों की बैठकों पर पाबंदी लगी हुई है। पर काफी जरूरी हो तो बैठकें आयोजित भी की जा रही हैं। पर सत्ता जब काबिज पार्टी के लिए शायद यह सब बातें गौड़ हो जाती हैं। ऐसी ही एक बैठक में नेता जी से जब सवाल किया गया तो वे अपने लहजे में बोले बैठक भी तो जनता की भलाई के लिए हो रही है। भले ही उसमें सामाजिक दूरी का पालन न हो रहा हो और फोटो खिंचवाने के लिए फोटोग्राफर की अनिवार्यता हो। ऐसे में किसी ने बेदिल ने कहा कि अब जनता तक सूचना भी तो पहुंचनी चाहिए कि उनकी भलाई के लिए कुछ हो न हो लेकिन बैठकें जरूर हो रही है।

बेदिल

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