पश्चिम बंगाल के खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक दिलीप घोष ने अपने प्रतिद्वंद्वी और टीएमसी पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप सरकार को 30506 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्होंने इस जीत की खुशी अपने विधानसभा में बुलडोजर पर चढ़कर पार्टी का झंडा लहराते हुए मनाया।

61 वर्षीय दिलीप घोष भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इनके कार्यकाल के दौरान भाजपा ने 2019 के संसदीय चुनाव में 42 में से 18 सीटें जीती थीं। अब जब भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत हासिल की है और सरकार बनाने जा रही है तो दिलीप का नाम मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने दिलीप घोष से बात की और उनसे भाजपा के एजेंडे समेत कई मुद्दों पर बात की।

सवाल- बंगाल में BJP सरकार का एजेंडा क्या होगा? राज्य के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों से वह कैसे निपटेगी?

सवाल के जवाब में दिलीप घोष ने कहा कि बिहार में भी हालात काफी खराब थे, लेकिन वहां अब स्थिति सुधर रही है। हम मानते हैं कि जहां नरेंद्र मोदी है, वहां सबकुछ मुमकिन है। पश्चिम बंगाल में संभावनाएं है और यहां के लोगों में क्षमता है, इसलिए हमें इस राज्य को वह मौका और यहां के लोगों को एक अच्छा प्रशासन देना होगा।

50 लाख से अधिक युवाओं ने रोजगार की तलाश में राज्य से पलायन कर रखा है। वे अपने घर लौटना चाहते हैं और यहां काम करना चाहते हैं। हम उन्हें मौका देंगे। टीएमसी के राज में कोई प्रशासन, न कानून व्यवस्था और न ही इंडस्ट्री थी।

शिक्षा विभाग खंडहर में तब्दील हो चुका है, स्वास्थ्य विभाग बुरे हाल में है। लोग राज्य छोड़कर जा रहे हैं, अगर यह रुक जाता है तो लोग राज्य के विकास में भागीदार बन सकते हैं। बंगाल के पास पहाड़ से लेकर समंदर तक, पोर्ट, रेलवे, एयरपोर्ट, मजदूर और संसाधन सबकुछ है। बंगाल के पास क्या कुछ नहीं है।

सवाल- आप इस जनादेश को कैसे देखते हैं?

यह लोगों का जनादेश है। लोगों ने हमें 2021 में ही सरकार में लाने की कोशिश की थी, लेकिन हमने शायद सोचा कि क्या यह हमसे संभलेगा या नहीं। लोगों ने उस दौरान हमें विपक्ष की भूमिका दी और हमने उसे बखूबी निभाया। फिर लोगों ने देखा कि बंगाल देश के विकास से अलग दिशा में जा रहा है तो उन्होंने सोचा की इसे वापस लाने की जरूरत है और लोगों ने भाजपा को मौका दिया।

सवाल- TMC ने आरोप लगाया है कि चुनाव नतीजों के बाद राज्य के कई हिस्सों में उसके कार्यकर्ताओं पर हमले हुए और पार्टी दफ़्तरों में तोड़फोड़ की गई है। इस पर BJP की क्या प्रतिक्रिया है?

साल 2021 के विधानसभा चुनाव रिजल्ट के बाद कितने भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, इसे हमें भूलना नहीं चाहिए। भाजपा हिंसा में विश्वास नहीं करती है। पिछली बार उन्होंने (टीएमसी) ने हमारे दर्जनों कार्यालयों पर कब्जा कर लिया था, उनके रंग बदल दिए और वहां अपने झंडे लगा दिए थे। उनमें से कुछ पार्टी कार्यालय को वापस लिया गया है। लोग जानते हैं कि वे भाजपा के दफ्तर थे, जहां अब हमारी पार्टी के झंडे लगाए जा रहे हैं, इसलिए डरने की कोई बात नहीं है। डायमंड हॉर्बर में उन्होंने जेसीबी से हमारी पार्टी के 12 दफ्तर गिरा दिए थे।

सवाल- अन्य दलों को लेकर भाजपा की सोच क्या है?

कई राज्यों में भाजपा की सरकार है और लोगों ने अपने जनादेश के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्र में बिठाया है। ऐसे में हर कोई जानता है कि भाजपा क्या है, सभी को निश्चिंत रहना चाहिए कि हम सभी को बराबर का मौका देंगे। ‘सबका साथ, सबका विकास’ लेकिन नई बात होगी ‘सबका हिसाब’– कानून अपना काम करेगा।

सवाल- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कह रही हैं कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, इस पर क्या कहना है आपका

बंगाल ने ममता बनर्जी को 15 साल दिए हैं, उन्हें तीन बार मौका मिला, लेकिन उन्होंने जनता के लिए कुछ नहीं किया। बस भ्रष्टाचार किए और केंद्र पर आरोप लगाए हैं। वह एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट गईं। सिर्फ शिकायत करने से कुछ नहीं होता, काम करना पड़ता है और जनता के सामने खुद को साबित करना पड़ता है। जनता ने उन्हें इतनी बड़ी सजा क्यों दी और वह अब भी शिकायत कर रही हैं।

सवाल- ममता 2021 में नंदीग्राम से और 2026 में भवानीपुर से अपनी सीट हार गई थीं। राजनीतिक रूप से क्या यह उनके सफर का अंत है?

यही बात उन्हें जनता भी कह रही है कि घर पर रहो, आराम करो और पूजा करो। लेकिन आदतें नहीं जाती, इसलिए वह दोबारा शिकायत करना शुरू कर दी हैं। लोगों को अब विकास चाहिए इसलिए उन्होंने भाजपा को चुना है।

सवाल- क्या लगता है कि पार्टी आपको कौन-सा पोर्टफोलियो देगी? काउंटिंग के दिन आप बुलडोजर पर सवार थे

पश्चिम बंगाल को ऐसी जेसीबी की जरूरत है जो भ्रष्टाचार, बांग्लादेशियों की घुसपैठ को जड़ से खत्म कर दे। पार्टी ने मुझे जो भी कार्य सौंपे हैं मैंने उसे ईमानदारी से निभाया है। पार्टी ने चुनाव लड़ने को कहा, मैं लड़ा और जीता भी। आगे जो भी पार्टी फैसला लेगी, मैं उसे मानूंगा।

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पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा से करारी शिकस्त मिलने के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता के कालीघाट आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बुधवार शाम बैठक की। इस बैठक में कुल 80 विधायकों को टीएमसी प्रमुख ने बुलाया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें