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दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान- असम के एनआरसी में 40 फीसदी हिंदू

असम के एनआर (नॉन रजिस्टर) में शत-प्रतिशत मुस्लिम नहीं हैं, उसमें 40 फीसदी हिंदू भी हैंः दिग्विजय सिंह।

Author जबलपुर | August 6, 2018 12:54 PM
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह। (फाइल फोटो)

 इन दिनों देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान आया है। उनका कहना है कि असम के एनआर (नॉन रजिस्टर) में शत-प्रतिशत मुस्लिम नहीं हैं, उसमें 40 फीसदी हिंदू भी हैं। जबलपुर में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए रविवार को सिंह ने कहा कि असम में जो एनआर है, उनमें शत-प्रतिशत मुस्लिम नहीं हैं, उनमें 40 फीसदी हिंदू भी हैं। कुल 40 लाख एनआर में 14 लाख हिंदू हैं। सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह व उनके परिवार पर जमकर हमला बोला और कहा कि व्यापम, अवैध उत्खनन तथा पोषण आहार घोटाले में वे और उनका परिवार लिप्त है। इसके अलावा ई-टेंडर घोटाले में भी भाजपा नेता लिप्त हैं।

उन्होंने आगे कहा, “झूठे आरोप लगाने वालों को मैं अदालत में लेकर गया। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा, विक्रम वर्मा व उमा भारती के खिलाफ कोर्ट में गया। स्वयं सुंदर लाल पटवा ने लिखकर दिया था कि दिग्विजय सिंह ईमानदार व निष्ठावान व्यक्ति हैं। उमा भारती 15 सालों में अभी तक आरोप के संबंध में कुछ साबित नहीं कर पाईं। मुख्यमंत्री शिवराज ने मुझे देशद्रोही कहा था तो मैं स्वयं गिरफ्तारी देने थाने पहुंच गया था। थाना प्रभारी ने लिखित में दिया कि मेरे खिलाफ कोई शिकायत व साक्ष्य नहीं है। सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद होता है और ऐसे पद में बैठे व्यक्ति ने आरोप लगाए थे।

उन्होंने कहा, “बिना साक्ष्य के वह ऐसे गंभीर आरोप नहीं लगा सकते, इसलिए मैं गिरफ्तारी देने गया था। आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में बजरंग दल व भाजपा के जिन नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, उनको बचाने का कार्य भाजपा सरकार कर रही है और मुझ पर देशद्रोही का आरोप लगा रही है। दिग्विजय ने आरोप लगाया कि “मुख्यमंत्री शिवराज और उनका परिवार व्यापमं, अवैध उत्खनन तथा पोषण आहार घोटाले में शामिल हैं। इसके आलाव ई-टेंडर में भाजपा के नेता शामिल हैं। उन्हें खुली चुनौती है कि आरोप निराधार हैं तो मुख्यमंत्री मेरे खिलाफ मानहानि का प्रकरण दर्ज कराएं।”

उन्होंने कहा कि राफेल डील का सच केंद्र सरकार को जनता के सामने लाना चाहिए। यूपीए सरकार ने जिस एयरक्राफ्ट का सौदा 550 करोड़ रुपये में किया था, एनडीए सरकार उसे 1600 करोड़ रुपये में खरीद रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रक्षामंत्री व कैबिनेट के बिना अनुमोदन ही फ्रांस जाकर डील कर आए और वित्त मंत्रालय से इस संबंध में कोई चर्चा तक नहीं की। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, “बाबा रामदेव को मैं शुरू से ठग कहता आया हूं। अन्ना हजारे का अवश्य शोषण किया गया है, उनके आंदोलन का भाजपा ने समर्थन किया था। चार वर्ष पूरे होने के बावजूद केंद्र सरकार ने लोकपाल लागू नहीं किया। प्रधानमंत्री को लोकायुक्त व लोकपाल पर विश्वास नहीं है।

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