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दिग्विजय सिंह बोले राज्यपाल ने हमें रविवार को नहीं बुलाया, राज्यपाल को पत्र भी लिखा था

एआईसीसी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने ‘‘हम 12 मार्च को ही दावा पेश करना चाहते थे लेकिन तब भी उन्होंने राज्यपाल ने हमें मिलने का समय नहीं दिया।’’

Author March 14, 2017 3:01 PM
एआईसीसी के महासचिव दिग्विजय सिंह

कांग्रेस पार्टी ने आज आरोप लगाया है कि पार्टी ने रविवार को दावा पेश करने के लिए समय मांगते हुए गोवा की राज्यपाल मृदुला सिंह को रविवार को एक पत्र दिया था लेकिन उन्होंने कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बुलाया ही नहीं। एआईसीसी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने गोवा कांग्रेस विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम 12 मार्च को ही दावा पेश करना चाहते थे लेकिन तब भी उन्होंने राज्यपाल ने हमें मिलने का समय नहीं दिया।’’

पार्टी के विधायक आज दोपहर को एक बार फिर राज्यपाल से मिलेंगे और दावा करेंगे कि उनके पास सरकार गठन के लिए उचित संख्या बल है। सिंह ने आरोप लगाया, ‘‘स्थापित सिद्धांत और संविधान के बावजूद राज्यपाल ने हमें सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाया बल्कि दूसरे सबसे बड़े दल :भाजपा: को मौका दे दिया।’’मृदुला सिन्हा पहले ही भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता दे चुकी हैं। इस गठ बंधन का नेतृत्व मनोहर पर्रिकर कर रहे हैं। शपथ ग्रहण आज शाम को होना है।

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बता दें इस मुद्दे पर आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने इस मुद्दे को उठाने का प्रयास किया। खडगे ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा ऐसा कर रही है। हमें अपनी बात रखने दिया जाए। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि अभी नहीं। जो कुछ भी कहना है, वे प्रश्नकाल के बाद कहें। अन्न्रदमुक सदस्यों को कुछ कहते देखा गया। हालांकि प्रश्नकाल के बाद मौका दिये जाने के स्पीकर के आश्वासन पर वे शांत हो गए।

कांग्रेस सदस्यों के अपनी बात रखने का मौका दिये जाने के आग्रह के बाद जब अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी तो खडगे ने कहा कि वे इसका विरोध करते हैं और सदन से वाकआउट करते हैं। इसके बाद कांग्रेस, राकांपा, राजद सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। उल्लेखनीय है कि गोवा में कांग्रेस के 17 विधायक हैं जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या 13 है। गोवा फारवर्ड पार्टी और एमजीपी के तीन-तीन विधायक हैं, तीन विधायक निर्दलीय और राकांपा का एक विधायक है।

पार्टी ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर पर्रिकर की नियुक्ति को चुनौती भी दी थी लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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