कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित राम मंदिर को मिले चढ़ावे में हुई गड़बड़ियों के मामले में चंपत राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की।
चंपत राय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के पद पर थे। राय ने चढ़ावा विवाद के तूल पकड़ने के बाद शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
कांग्रेस नेता ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि विहिप और आरएसएस का धर्म और धार्मिक व्यवस्थाओं से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, ”ये लोग जमीन हड़पने का काम करते हैं। इनसे अधिक भ्रष्ट कोई समूह नहीं है। न तो इनका कोई पंजीकरण है, न ही इनसे कोई कर लिया जाता है। इसके बावजूद ऐसे संगठन को इतनी ताकत दे दी गई है। ये लोग केवल और केवल मठों एवं मंदिरों पर कब्जा करना चाहते हैं।”
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर के लिए करीब साढ़े बारह करोड़ परिवारों से चंदा लिया गया लेकिन इसका कहीं कोई हिसाब नहीं है।
बीजेपी, आरएसएस और विहिप की है जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने इस प्रकरण की पूरी जिम्मेदारी बीजेपी, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की है और ये सभी आरोपियों को बचाने में लगे हुए हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा, ”जिन लोगों में धर्म के प्रति आस्था है, सनातन धर्म के प्रति आस्था है और भगवान राम के प्रति आस्था है, वे इस चोरी और लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसकी पूरी-पूरी जवाबदेही और जिम्मेदारी भाजपा, आरएसएस और विहिप पर है।”
कांग्रेस नेता ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”हमारी मांग है कि चंपत राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। गिरफ्तार करो चंपत राय को, अनिल मिश्रा को! इन्होंने यह सब खुलेआम किया है और प्रमाण के लिए महिपाल सिंह हैं एवं दीनानाथ वर्मा हैं। आप उनका प्रमाण क्यों नहीं लेते? उनका बयान लीजिए।”
गांव-गांव जाएगी कांग्रेस
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव जाएगी और इसके लिए वार्ड से लेकर जिला स्तर पर समितियां गठित की जा रही हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा, विहिप और आरएसएस मिलकर सनातन धर्म की सारी परंपराओं का विनाश किया है और सनातन धर्म का पालन करने वालों को धोखा दिया है।
इस मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में बृहस्पतिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र रचने समेत विभिन्न आरोपों में बीएनएस के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गयी थी। इसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को इस मामले को एक खबर का हवाला देते हुए उठाया था और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। बाद में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस मामले में विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था।
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हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी महंत राजू दास ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के अयोध्या में राम मंदिर चंदा ‘चोरी’ मामले पर दिए गए विवादित बयानों की आलोचना की और कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
