जब दिग्विजय सिंह के कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों से फिसल गई थी CM की कुर्सी

कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का दावा किया जा चुका है कि दिग्विंजय सिंह (Digvijay Singh) के कारण ही सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के हाथ से सीएम की कुर्सी फिसल गई थी।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया (बाएं), कमनाथ और दिग्विजय सिंह (दाएं)- फाइल/ एक्सप्रेस फोटो

ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) बीजेपी में आने से लंबे समय तक कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते थे। राहुल गांधी के बेहद करीबी होने के कारण उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी प्रबल थी लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों में इस संभावना को शून्य में तब्दील करने का काम दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने किया था। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का दावा किया जा चुका है कि दिग्विंजय सिंह (Digvijay Singh) के कारण ही सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के हाथ से सीएम की कुर्सी फिसल गई थी। यहीं से उनके कांग्रेस से बाहर जाने की सुगबुगाहट शुरू हुई थी। सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के बीजेपी में शामिल होने के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। अब वह केंद्रीय कैबिनेट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली जीत के हीरो ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ को माना जा रहा था। उन चुनावों में सिंधिया कांग्रेस के मुख्य प्रचारक और अभियान समिति के प्रमुख थे। दूसरी तरफ कमलनाथ के हाथों में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी थी। सिंधिया जहां राहुल गांधी के बेहद खास माने जाते थे और कमलनाथ की गिनती सोनिया गांधी के विश्वस्तों में होती है।

चुनाव के बाद सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का दावा इस लिए मजबूत हो गया था क्योंकि उनके प्रभाव वाले चंबल-ग्वालियर में कांग्रेस ने 34 में से 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद राहुल गांधी जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के शपथ ग्रहण समारोह में गए तो ज्योतिरादित्य उनके साथ गए तो इस दावे को और पुख्ता माना जाने लगा कि आने वाले कुछ दिनों में सीएम पद के लिए सिंधिया का ऐलान हो जाएगा लेकिन इस बीच सारे समीकरण बिगड़ने लगे।

जब पार्टी, मुख्यमंत्री के पद पर मंथन कर रही थी तो दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने एक ट्वीट किया, जहां 31 विधायक उनके बेटे जयवर्धन को बधाई देने के लिए उनके घर पहुंचे थे। जयवर्धन राघोगढ़ विधानसभा सीट से जीते थे। दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट को उनकी सियासी ताकत के तौर पर देखा जाने लगा। जानकारों का कहना है कि इस फोटो के जरिए दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया था यदि सिंधिया के पास 26 विधायकों का समर्थन है तो मेरे पास भी 31 विधायकों की ताकत है।

इसके बाद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने पार्टी के अलग-अलग खेमों से कुछ विधायकों को कमलनाथ के पक्ष में लाकर खड़ा कर दिया है। कई निर्दलीय विधायक भी कमलनाथ के पक्ष में खड़े दिखाई दिए थे, ऐसा कहा जाता है कि यह निर्दलीय भी दिग्विजय सिंह के संपर्क में थे। कुल मिलाकर कमलनाथ के पक्ष में 80 से ज्यादा विधायक नजर आने लगे। यहां से पार्टी आलाकमान को दोबारा मंथन के लिए मजबूर होना पड़ा।

मंत्रणा के बीच कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दिल्ली पहुंचे। यहां तय हुआ कि मुख्यमंत्री पद कमलनाथ को दिया जाएगा। इस ऐलान के करीब 15 महीनों के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) कांग्रेस पार्टी से अलग हो गए और कमलनाथ सरकार गिर गई थी।

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