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जिता कर न ला पाने वाले मंत्रियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 71 पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है। इन सीटों पर बीते पांच बरस के दरम्यान कितने काम हुए? और दो बरस की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं का लाभ कहां तक पहुंचाया?

Author April 15, 2019 4:10 AM
योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य

अंशुमान शुक्ल

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के 42 से अधिक मंत्रियों की साख दांव पर है। दरअसल सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में इन मंत्रियों को अपनी विधानसभा की लोकसभा सीट के अतिरिक्त एक और लोकसभा सीट का प्रभार सौंपा गया है। जो दो लोकसभा सीटें योगी सरकार के लगभग 24 मंत्रियों को जिता कर लाने का जिम्मा सौंपा गया है, उनमें गड़बड़ी सहन नहीं की जाएगी। ऐसे में लोकसभा परिणाम उत्तर प्रदेश के कई मंत्रियों की तकदीर का भी फैसला करने जा रहे हैं। सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में अपने दुर्ग उत्तर प्रदेश को सुरक्षित रखने में भारतीय जनता पार्टी कोई कसर छोड़ नहीं रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने योगी सरकार के मंत्रियों को नई जिम्मेदारी दी है। जो पार्टी और संगठन दोनों ही लिहाज से बेहद अहम है। प्रत्येक मंत्री को उस लोकसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो उसके विधानसभा की है। उसके अतिरिक्त एक अन्य लोकसभा सीट को जिता कर लाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं मंत्री के पास होगी। ऐसे में प्रत्येक मंत्री के जिम्मे दो सीटें हैं।

भारतीय जनता पार्टी के सूत्र बताते हैं कि ऐसा करने का सबसे बड़ा कारण उन मंत्री का जनता के समक्ष रिपोर्ट कार्ड का आकलन करना है। मसलन, भाजपा ने इलाहाबाद से डॉ रीता बहुगुणा जोशी को उम्मीदवार बनाया है। वे मौजूदा योगी सरकार में लखनऊ की कैंट विधानसभा से चुनकर आईं और उन्हें महिला और बाल विकास विभाग के कबीना मंत्री के पद से नवाजा गया। डॉ जोशी का साथ देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और स्टाम्प और उड्डयन मंत्री नंद गोपाल दास नंदी को लगाया गया है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य खुद प्रयागराज से आते हैं। ऐसे में खुद समझा जा सकता है कि डॉ रीता बहुगुणा जोशी का चुनाव कितनों का भविष्य तय करने जा रहा है।

दरअसल सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 71 पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है। इन सीटों पर बीते पांच बरस के दरम्यान कितने काम हुए? और दो बरस की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं का लाभ कहां तक पहुंचाया? लोकसभा के चुनाव परिणाम इनपर भी अपनी राय रखेंगे। सत्रहवीं लोकसभा के चुनावों की तैयारी उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद शुरू हुर्इं। पूरे प्रचार और प्रसार के साथ सरकारी योजनाओं को गावों तक पहुंचाने की बात कही गई। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अभय अवस्थी कहते हैं, उत्तर प्रदेश में कुल गावों की संख्या 57609 है, जबकि जिले 75 हैं। यदि केंद्र और राज्य की सरकारों ने इन गावों और जिलों तक विकास पहुंचाया है तो उसे इत्मीनान से बैठे रहने की जरूरत है। जनता तय करेगी, उस तक क्या और कितना पहुंचा?

उत्तर प्रदेश के कई मंत्रियों के पास जिलों के भी प्रभार हैं। मसलन कैबिनेट मंत्री टंडन के पास उन्नाव का प्रभार है और सिद्धार्थनाथ सिंह के पास बस्ती का प्रभार है। सांसद-विधायक कांड ने जिले के प्रभारी मंत्रियों की किरकिरी पहले ही बहुत कराई है। ऐसे में दो लोकसभा चुनावों की जिम्मेदारी मिल जाने के बाद उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक मंत्री बेचैन हैं। उन्होंने साख बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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