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आप में मतभेदों की सुगबुगाहट

करीब दो साल पहले आंदोलनों से उपजी आम आदमी पार्टी में संकट बढ़ने के आसार हैं। पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास ने पार्टी के आलाकमान में संवाद और परस्पर विश्वास की कमी के कारण पार्टी में दो गुट बनने की ओर इशारा किया है। ऐसा लगता है कि आप में मतभेद पैदा हो रहे […]

Author March 2, 2015 9:37 AM
AAP Crisis: यादव और भूषण को छोड़कर पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं के भी आज केजरीवाल से मिलने और मुद्दे पर बातचीत करने की संभावना है। (फ़ोटो-पीटीआई)

करीब दो साल पहले आंदोलनों से उपजी आम आदमी पार्टी में संकट बढ़ने के आसार हैं। पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास ने पार्टी के आलाकमान में संवाद और परस्पर विश्वास की कमी के कारण पार्टी में दो गुट बनने की ओर इशारा किया है। ऐसा लगता है कि आप में मतभेद पैदा हो रहे हैं जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भूमिका भी शामिल है, क्योंकि आंतरिक लोकपाल ने शीर्ष नेतृत्व में दो गुट बनने की ओर इशारा करते हुए पार्टी से कहा है कि वह एक व्यक्ति, एक पद व्यवस्था पर विचार करे।

आप संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सत्ता में आने के मुश्किल से दो सप्ताह बाद ही पूर्व नौसेना प्रमुख व पार्टी के आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले पिछले हफ्ते राजनीतिक परामर्श समिति (पीएसी) को लिखे एक पत्र में सिफारिश की है कि पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को लेकर किसी भी आलोचना से एक स्वतंत्र समूह द्वारा निपटा जाना चाहिए जो आंतरिक लेखा परीक्षा करता है।

रामदास ने इस पत्र में कहा है कि आप को सही मायने में महिलाओं के प्रति संवेदनशील पार्टी बनने की जरूरत है क्योंकि न तो उसकी पीएसी और न ही उसके नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में कोई महिला सदस्य है। पत्र के मुताबिक, पिछले छह से आठ महीनों के दौरान पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद और परस्पर विश्वास पूरी तरह से नाकाम हो गया है। रामदान ने कहा कि मेरा मानना है कि इससे पार्टी के भीतर दो गुट बढ़े हैं और षड्यंत्रों की बातें हो रही हैं। निर्णय लेने और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र को लेकर पार्टी के भीतर आलोचना हो रही है।

रामदास ने यह स्पष्ट करने पर अधिक जोर दिया है कि क्या केजरीवाल दो पद-दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय संयोजक संभाल सकते हैं। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि शीर्ष नेतृत्व में संवाद और परस्पर विश्वास पूरी तरह से विफल हो गया है जो अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि आज हम एक राष्ट्रीय पार्टी हैं और हम अपनी दृष्टि दिल्ली या राजधानी के भीतर कुछ क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते हैं। यह रुख केजरीवाल के विपरीत है। केजरीवाल ने कहा है कि पार्टी दिल्ली पर ध्यान केंद्रित रखेगी। केजरीवाल परोक्ष रूप से योगेंद्र यादव सहित उन नेताओं से अप्रसन्न हैं जिन्होंने इसके उलट सुझाव दिए हैं।

आप सूत्रों ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ने इस हफ्ते के शुरू में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन इस कदम का सदस्यों ने जोरदार विरोध किया था। रामदास ने पत्र में लिखा है कि यह अस्वीकार्य है और दिखाता है कि हम दूसरी पार्टियों से किसी भी मायने में अलग नहीं हैं जिनकी हम आलोचना करते हैं। मैं पार्टी के पूरे नेतृत्व से आग्रह करता हूं कि अफवाहों पर ध्यान देना और सहयोगियों को हतोत्साहित करना बंद करें जो एक-दूसरे की नकारात्मक प्रतिक्रिया लाते हैं।

उन्होंने कहा है कि एक राज्य के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय संयोजक यदि एक ही व्यक्ति हो तो क्या वह दोनों जिम्मेदारियां कुशलता से निभा सकता है? क्या हमें सह संयोजकों की जरूरत है? हम किस तरह की रूपरेखा खोज रहे हैं? उन्होंने कहा है कि दिल्ली के परिणामों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पड़ा है और राष्ट्रीय राजधानी से बाहर पूरे भारत में आम आदमी पार्टी के समर्थकों के बीच उम्मीदें जगी हैं। हमें इसे समझने और इसके अनुरूप कार्यक्रम बनाने की जरूरत है। सूत्रों ने कहा कि आप के दो वरिष्ठ नेता व उसके शक्तिशाली राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण उम्मीदवारों के चयन को लेकर नाखुश थे। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा दोनों पिछले साल हरियाणा विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के भी पक्ष में नहीं थे।

पूर्व में शाजिया इल्मी जैसे नेताओं ने पार्टी के भीतर लोकतंत्र की कमी को लेकर पार्टी छोड़ दी थी। पत्र में कहा गया है कि दिल्ली चुनाव से पहले भूषण की ओर से उठाए मुद्दों को लेकर एक संकट वाली स्थिति थी। इसमें दावा किया गया है कि भूषण ने यह भी धमकी दी थी कि अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो वे त्यागपत्र दे देंगे। पत्र में कहा गया है कि दिसंबर 2014 के अंत में उम्मीदवारों के चयन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भूषण की अप्रसन्नता के कारण एक संकट वाली स्थिति उत्पन्न हो गई थी। उन्होंने कहा था कि अगर इसका समाधान नहीं हुआ तो वे पार्टी से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे और उसे सार्वजनिक करेंगे।

पत्र में कहा गया है कि इसे रोकने के लिए दिल्ली में पिछली तीन-चार जनवरी को एक विशेष बैठक बुलाई गई थी, जिसमें फैसला किया गया था कि इस मुद्दे को आप लोकपाल को भेजा जाएगा जिसमें एक विशेष रूप से चयनित टीम सहायता करेगी। सूत्रों ने कहा कि केजरीवाल तब परेशान हो गए जब पार्टी नेताओं के एक वर्ग ने उनके द्वारा दो भूमिका, दिल्ली के मुख्यमंत्री और पार्टी संयोजक, निभाने का मुद्दा उठाया। माना जाता है कि केजरीवाल ने पार्टी चलाने के लिए और स्वतंत्रता की मांग की।
रामदास की चिट्ठी

आप को सही मायने में महिलाओं के प्रति संवेदनशील पार्टी बनने की जरूरत है क्योंकि न तो उसकी पीएसी और न ही उसके नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में कोई महिला सदस्य है। पिछले छह से आठ महीने के दौरान पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद और परस्पर विश्वास पूरी तरह से विफल हो गया है। मेरा मानना है कि इससे पार्टी के भीतर दो गुट बढ़े हैं और षड्यंत्रों की बातें हो रही हैं। यह अस्वीकार्य है और दिखाता है कि हम दूसरी पार्टियों से किसी भी मायने में अलग नहीं हैं जिनकी हम आलोचना करते हैं।

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