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ओड़ीशा: नहीं मिली एंबुलेंस, गोद में लेकर जाना पड़ा बेटे का शव

इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना में एक लाचार पिता को अपने बेटे का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिल सकी।

Author इटावा | May 3, 2017 4:06 AM
इटावा के विक्रमपुर गांव के रहने वाले उदयवीर सिंह अपने 15 वर्षीय बीमार बेटे पुष्पेंद्र को गंभीर हालत में उपचार के लिए लाए।

इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना में एक लाचार पिता को अपने बेटे का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिल सकी। पिछले साल ओड़ीशा में भी ऐसी ही ह्रदयविदारक घटना सामने आई थी जिसमें एक व्यक्ति को अपनी पत्नी का शव कंधे पर ले जाना पड़ा था। मंगलवार को इटावा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजीव कुमार यादव ने बताया कि मामला सोमवार दोपहर ढाई बजे के आसपास का है। इटावा के विक्रमपुर गांव के रहने वाले उदयवीर सिंह अपने 15 वर्षीय बीमार बेटे पुष्पेंद्र को गंभीर हालत में उपचार के लिए लाए। उदयवीर ईंट भटटे पर मजदूरी करते हैं। उनके बेटे के पेट में दो दिन से दर्द हो रहा था। सोमवार को जब वे अस्पताल में इमरजेंसी में तैनात डाक्टर पीयूष त्रिपाठी के पास पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है। बताते हैं कि इसी समय सड़क हादसे में घायल कई अन्य लोगों को इमरजेंसी में लाया गया और इस दौरान उदयवीर अपने बेटे के शव को गोद में उठाकर शोकाकुल हालत में अस्पताल परिसर से बाहर आ गए। किसी ने उनकी तस्वीरों को कैमरे में कैद कर लिया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।
कहा जा रहा है कि उन्हें एंबुलेंस की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। उदयवीर अकेले ही बेटे के शव को अस्पताल के बाहर लाए और टेंपो में लादकर अपने गांव ले गए। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उदयवीर ने एंबुलेंस की कोई मांग नहीं की और वह बिना बताए ही इमरजेंसी वार्ड से बाहर चले गए।

डाक्टर पीयूष त्रिपाठी का कहना है कि पुष्पेंद्र की जांच की गई थी। वह मृत अवस्था में आया था, इसी बीच भरथना में बस दुर्घटना के यात्री आ गए जिसके कारण अस्पताल के डाक्टर व कर्मचारी व्यस्त हो गए। उदयवीर ने एंबुलेंस की मांग किसी से नहीं की और बिना बताए ही बेटे को लेकर चला गया।मामला सोशल मीडिया में आने पर शाम को सीएमओ डा. राजीव यादव अस्पताल में पहुंचे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। अगर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है तो कार्रवाई होगी। उदयवीर से भी पूछा जाएगा कि उसने एंबुलेंस की मांग की थी या नहीं। उधर उदयवीर का कहना है कि डाक्टरों ने बच्चे को देखने के बाद उसे मरा हुआ बता दिया और शव को घर ले जाने की बात कह डाली ऐसे में हमारी मजबूरी यह थी कि हम क्या करते।

 

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