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झारखंड के डीजीपी भगवा वस्त्र पहन, गले में सांप डाल बन गए थे ‘शिवशंकर’, अब रिपोर्ट तलब

डीजीपी डी.के. पांडे को गले में सांप लटकाने को लेकर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा-9 के उल्लंघन का दोषी बताया जा रहा है। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा-9 के तहत शेडूल वन्य जीवों को अपने पास रखना अपराध माना जाता है।
झारखंड के पुलिस महानिदेशक डी.के. पांडे।(फाइल फोटो)

झारखंड के पुलिस महानिदेशक डी.के. पांडे द्वारा कथित रूप से अपने गले में जीवित सांप लपेटने को गंभीरता से लेते हुए झारखंड के प्रधान वन संरक्षक (पीसीसीएफ) वन्यजीव ने उनसे जवाब मांगा है। स्थानीय समाचार पत्रों में महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की तरह भगवा कपड़ों और गले में जीवित सांप लपेटे पांडे की एक तस्वीर छपी है। मीडिया में इस आशय की रपट आने के बाद कार्रवाई करते हुए पीसीसीएफ-वन्यजीव लाल रत्नाकर सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों से मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए कहा है।

वन्य अधिकारियों ने आईएएनएस से कहा कि सांप रखना वन्य कानून के खिलाफ है और इसके उल्लंघन पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। वरिष्ठ वन्य अधिकारियों ने मीडिया से कहा कि उन्होंने डीजीपी से इस मामले में जवाब मांगा है। झारखंड के मुख्य वनसंरक्षक लाल रत्नाकर सिंह ने विभाग के अफसरों को यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि डीजीपी गले में सांप लटकाकर कब और कहां तस्वीर खिंचवाई थी।

बता दें कि डीजीपी डी.के. पांडे को गले में सांप लटकाने को लेकर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा-9 के उल्लंघन का दोषी बताया जा रहा है। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा-9 के तहत शेडूल वन्य जीवों को अपने पास रखना अपराध माना जाता है। धारा-9 के सेक्शन-43 में प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति इस तरह का जानवर बिना मुख्य वन संरक्षक यानि पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की अनुमति के बिना अपने पास नहीं रख सकता। इसका उल्लंघन वाले को अधिनियम की धारा-51(1) में 3 साल तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है।

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