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Kerala Assembly Elections 2016 results: केरल में फिर से सत्ता में आई एलडीएफ

93 साल के वीएस अच्युतानंदन के करिश्माई नेतृत्व के बूते मोर्चे ने बहुमत के साथ केरल की सत्ता फिर हासिल कर ली। इसके साथ ही भाजपा ने भी राज्य विधानसभा में अपना खाता खोलकर नया इतिहास रच दिया है।
Author नई दिल्ली/ केरल | May 20, 2016 04:06 am
केरल की सत्ता में इस वक्त माकपा की अगुआई वाला वाम मोर्चा (एलडीएफ) है। (फाइल फोटो)

माकपा की अगुआई वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) को केरल विधानसभा चुनाव में धूल चटा दी। 93 साल के वीएस अच्युतानंदन के करिश्माई नेतृत्व के बूते मोर्चे ने बहुमत के साथ केरल की सत्ता फिर हासिल कर ली। इसके साथ ही भाजपा ने भी राज्य विधानसभा में अपना खाता खोलकर नया इतिहास रच दिया है।
एलडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 91 सीटों पर जीत दर्ज की है। एलडीएफ ने अपने दम पर 85 सीटें जीती हैं, जबकि छह सीटों पर इसके समर्थन वाले निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। एलडीएफ के प्रचार अभियान के प्रमुख चेहरे 93 वर्षीय वीएस अच्युतानंदन और माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य पिनरई विजयन, थॉमस इसाक, ईपी जयराजन और अभिनेता मुकेश एलडीएफ के जीत दर्ज करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ राजगोपाल ने माकपा के विधायक वी शिवनकुट्टी को 8671 मतों के अंतर से हराकर नेमोम विधानसभा सीट जीत ली। हालांकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कुम्मनम राजशेखरन और पूर्व अध्यक्ष वी मुरलीधरन जैसे वरिष्ठ नेता हारने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।

वाडक्कनचेरी में यूडीएफ उम्मीदवार अनिल अक्कारा ने सबसे कम तीन मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। क्रिकेटर श्रीसंत राजनीति में अपनी पहली पारी में मतदाताओं को प्रभावित करने में नाकाम रहे और उन्हें महज 34764 मत हासिल हुए। कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) को मुंह की खानी पड़ी है और इसे केवल 46 सीटें मिली हैं। यूडीएफ अपने महत्त्वपूर्ण घटक आइयूएमएल के गढ़ मालमपुरम में 12 सीट हासिल करने में सफल रहा और एर्नाकुलम में भी इसने नौ सीटों पर जीत दर्ज की है ।
एलडीएफ ने त्रिशूर, कन्नूर, कोझिकोड, कोल्लम, अलप्पुझा और तिरुवनंतपुरम जिलों में जबर्दस्त प्रदर्शन किया और अधिकतर सीटों पर जीत का परचम फहरा दिया है। त्रिशूर में 13 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक को छोड़ कर सभी सीटें एलडीएफ की झोली में चली गईं। कोल्लम में एलडीएफ ने सभी 10 सीटों को अपनी जीत की आंधी में हासिल कर लिया।

हालांकि मुख्यमंत्री ओमन चांडी, पूर्व वित्त मंत्री केएम मणि, जिन्हें रिश्वत के आरोपों के चलते इस्तीफा देना पड़ा था, एलडीएफ की आंधी में बचने में कामयाब रहे। उनके चार मंत्रिमंडल सहकर्मी- के बाबू, जो बार मामले में आरोपों में घिरे थे, शिबू बेबी जॉन (आरएसपी), केपी मोहनन- जद (एकी), पीके जयलक्ष्मी (कांग्रेस) औंधे मुंह जा गिरे।

विधानसभा अध्यक्ष एन शक्तन, उपाध्यक्ष पालोडे रवि और कांग्रेस नेता के सुधाकरन, पंडलम सुधाकरन, पूर्व मंत्री, डोमिनिक प्रजेंटेशन, पद्मजा वेणुगोपाल और शनिमोल उस्मान यूडीएफ खेमे में हारने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। जबर्दस्त हार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चांडी ने कहा कि ये नतीजे एक झटका हैं और यूडीएफ इन नतीजों पर विस्तार से चर्चा करेगा।

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