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गंगा सागर में पुण्य स्नान के लिए पहुंचे 16 लाख से ज्यादा श्रद्धालु, मेले के लिए रखा गया है 100 करोड़ का बजट

देश की पवित्र नदियों में से एक गंगा नदी गंगोत्री से निकल कर पश्चिम बंगाल में आकर सागर से मिलती है। गंगा का जहां सागर से मिलन होता है उस स्थान को गंगासागर कहते हैं।

गंगा सागर में स्नान करते श्रद्धालु, फोटो सोर्स- ANI

देश की पवित्र नदियों में से एक गंगा नदी गंगोत्री से निकल कर पश्चिम बंगाल में आकर सागर से मिलती है। गंगा का जहां सागर से मिलन होता है उस स्थान को गंगासागर कहते हैं। इसे सागरद्वीप भी कहा जाता है। ये स्थान देश में आयोजित होने वाले तमाम बड़े मेलों में से एक गंगासागर मेला के लिए भी काफी मशहूर है। ऐसे में गंगासागर में पुण्य स्नान करने के लिए देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लाखों की तादाद में श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। आज (सोमवार) सुबह से तीर्थयात्रियों की बड़ी संख्या स्नान कर रही है। जानकारी के मुताबिक इस स्नान के लिए करीब 16 लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

जल-थल के रास्ते आ रहे श्रद्धालु: देश के विभिन्न हिस्सों से कोलकाता पहुंचने के बाद श्रद्धालु रेल, सड़क व जल मार्ग से गंगासागर रवाना हो रहे हैं। सियालदह व कोलकाता स्टेशनों से काकद्वीप व नामखाना तक स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से गंगासागर के लिए एक हजार से अधिक बसें भी चलाई जा रही हैं। ये बसें कोलकाता के धर्मतल्ला व बाबूघाट से रवाना होकर श्रद्धालुओं को काकद्वीप पहुंचाती हैं| फिर वहां से लोग नदी पार कर सड़क मार्ग से मेला परिसर पहुंच रहे हैं। कुछ श्रद्धालु हावड़ा से लॉन्च (मोटरबोट) व स्टीमरों के जरिये जलमार्ग से गंगासागर पहुंच रहे हैं।

करने लगे हैं स्नान: तीर्थयात्री यहां लगाए गए शिविरों में ठहरने के साथ ही पवित्र गंगासागर में स्नान भी करने लगे हैं। आज सोमवार तड़के से ही हजारों श्रद्धालु सागर में डुबकी लगा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मकर संक्रांति आज सोमवार को रात्रि 8.05 बजे से शुरू हो रही है। इसके साथ ही पुण्य स्नान का समय 15 जनवरी मंगलवार को सुबह 7.19 से दोपहर 12.30 बजे तक है। ऐसे में पुण्यकाल के पूर्व स्नान करने के बारे में श्रद्धालुओं का कहना है कि जब गंगासागर में डुबकी लगाने का मौका मिल रहा है, तो फिर पीछे क्यों रहें। आज भी स्नान करेंगे और मकर संक्रांति काल में भी स्नान करेंगे।

धुनी रमाए हैं साधु-संत: यहां बड़ी संख्या में साधु-संत भी पहुंचे हैं। गंगासागर के तट पर कल्पवास कर रहे साधुओं के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई शरीर पर धुनी रमाए, तो कोई चिलम के नशे में मगन, कोई ईश्वर की धुन में, तो कोई ध्यान की मुद्रा में यहां कल्पवास कर रहा है। श्रद्धालु इन साधु-संतों से भी आशीष ले रहे हैं।

दान-गोदान: स्नान के बाद श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही तिल-चावल का दान करते हैं। इसके साथ ही समुद्र देवता को नारियल भी अर्पित किया जाता है। यहां गोदान कर मोक्ष प्राप्ति की कामना भी जाती है। गोदान कराने एवं दान-दक्षिणा लेने के लिए भी यहां बड़ी संख्या में पुजारी पहुंचे हैं।

100 करोड़ का बजट: मान्यता है कि गंगासागर की तीर्थयात्रा सैकड़ों तीर्थयात्राओं के समान है। इसकी पुष्टि एक प्रसिद्ध लोकोक्ति से होती है, जिसमें कहा गया है, ‘सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’। हालांकि यह उस ज़माने की बात है, जब यहां पहुंचना बहुत कठिन था। आधुनिक परिवहन और संचार साधनों से अब यहां आना सुगम हो गया है। इस साल का बजट 100 करोड़ के आसपास है।

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