इक्कीस साल में भी पर्यटन प्रदेश नहीं बन पाई देवभूमि

उत्तराखंड राज्य 21 साल में भी पूरी तरह पर्यटन प्रदेश बनने में नाकाम रहा है।

उत्‍तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं। फाइल फोटो।

उत्तराखंड राज्य 21 साल में भी पूरी तरह पर्यटन प्रदेश बनने में नाकाम रहा है। 21 साल में राज्य की विभिन्न सरकारों ने पर्यटन के विकास को लेकर कई बड़े एलान किए परंतु कई योजनाएं धरातल पर उतरी ही नहीं। राज्य सरकार के सामने पर्यटन सुविधाओं के विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने की चुनौती बनी हुई है। राज्य में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो सुविधाओं के अभाव में देश दुनिया के पर्यटकों की पहुंच से बहुत दूर हैं, यदि इन पर्यटक स्थलों का विकसित किया जाए तो राज्य के लिए पर्यटन व्यवसाय आर्थिक तौर पर से ज्यादा मुनाफे का व्यवसाय साबित होगा।

राज्य सरकार ने उत्तराखंड में पर्यटन व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए राज्य के 13 जिलों के लिए 13 नए पर्यटक स्थल विकसित करने की योजना बड़े जोर-शोर से शुरू की थी और इस योजना पर अब तक 10 करोड़ से ज्यादा की धनराशि खर्च हो चुकी है। 20 करोड़ रुपए से ज्यादा और इस योजना पर खर्च होने का प्रस्ताव है परंतु यह योजना बीरबल की खिचड़ी साबित हुई है।

ऋषिकेश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में और एक स्वच्छ और सुविधा संपन्न शहर के रूप में विकसित करने की योजना थी। इसके अलावा टिहरी झील को राष्ट्रीय विकास बैंक की आर्थिक मदद से 1,210 करोड़ रुपए की योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनाने की योजना थी जो धरातल पर नहीं उतर पाई। राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का 13 जिलों में पर्यटन स्थल विकसित करने का सपना था।

उन्होंने राज्य में पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने के लिए महाभारत और रामायण सर्किट की योजना को भी जमीन पर उतारने के लिए रात दिन एक किया था परंतु यह योजना अभी तक केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए इंतजार कर रही है। राज्य के पर्यटन विभाग ने महाभारत सर्किट के अंतर्गत देहरादून जिला के जौनसार चकराता क्षेत्र में लाक्ष्य गृह लाखामंडल, चमोली जिले में स्वर्गारोहिणी बद्रीनाथ सतोपंथ तथा पौड़ी गढ़वाल जिले में सीता माता मंदिर, जटायु मंदिर, भरत मंदिर को इस योजना में शामिल किया था। इसकी विस्तृत योजना केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज भी दी गई है परंतु अब तक केंद्र सरकार ने इस योजना पर कोई रुचि नहीं दिखाई है और यह योजना केंद्र के उदासीन रवैये के कारण अधर में लटकी हुई है।

राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने राज्य के जिन 13 जिलों में 13 नए पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना बनाई थी उनमें अल्मोड़ा जिले में कटारमल सूर्य मंदिर, पौड़ी जिले के सतपुली में नौका विहार, नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में हिमालय दर्शन, देहरादून जिले के लाखामंडल में महाभारत सर्किट बनाने, हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में 52 शक्ति पीठ का निर्माण करने, उत्तरकाशी जिले में 2 नए ट्रैकिंग स्थल विकसित करना, टिहरी जिले में टिहरी झील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करना, रुद्रप्रयाग में प्राकृतिक और हरित पर्यटन के रूप में नए पर्यटन स्थलों का निर्माण करना, उधम सिंह नगर जिले में बाणसागर क्षेत्र में जल क्रीड़ा स्थल निर्माण करना, बागेश्वर जिले में गरुड़ घाटी में हिमालय दर्शन और अन्य पर्यटन स्थलों का विकास करना, चंपावत जिले में पाटी देवीधुरा में पर्यटन स्थल विकसित करना, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में प्राकृतिक और हरित पर्यटक स्थल विकसित करने की योजना शामिल है, परंतु यह योजनाएं हवाई साबित हो रही है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सात पर्यटक स्थलों नैनीताल, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब पंचकोशी, नई टिहरी, औली, मुनस्यारी और ऋषिकेश नीलकंठ में रोपवे में लगाने की योजना थी परंतु वे कागजी साबित हो रही हैं। उत्तराखंड के पुराने पर्यटक स्थल नैनीताल, अल्मोड़ा, हरिद्वार, मसूरी, ऋषिकेश अभी भी विकास की राह देख रहे हैं। विकास के नाम पर इन क्षेत्रों में अंधाधुंध तरीके से बड़े-बड़े अपार्टमेंट बन रहे हैं जिन्होंने इन पर्यटक और तीर्थस्थलों का स्वरूप ही बिगाड़ दिया है और इन पर्यटक और तीर्थस्थलों में दमघोटू माहौल बना हुआ है। राज्य के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर कहते हैं कि राज्य के 13 जिलों के 13 नए पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना दीर्घकालीन योजना है। इस योजना पर कार्य चल रहा है। इसके परिणाम जल्दी सामने आने लगेंगे टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए खाका तैयार कर लिया गया है जिसे जल्दी ही धरातल पर उतारा जाएगा।

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