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देवरिया शेल्‍टर होम: नाश्‍ते में सूखी रोटी खिला दिनभर लिया जाता था काम, रात में यौन शोषण

देवरिया के विंध्‍यवासिनी बालिका संरक्षण गृह से छुड़ाई गईं लड़कियों ने शेल्‍टर होम के बारे में चौंकाने वाली जानकारी दी है। उन्‍होंने बताया क‍ि उन्‍हें नाश्‍ते में दो सूखी रोटियां और अचार दिया जाता था। साथ ही दोगुनी उम्र के पुरुषों से शादी करने के लिए मजबूर भी किया जाता था। इसके लिए बकायदा सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाता था।

देवरिया (उत्‍तर प्रदेश) के विंध्‍यवासिनी बालिका संरक्षण गृह को लेकर हर दिन चौंकाने वाले और बेहद अमानवीय मामलों का खुलासा हो रहा है। शेल्‍टर होम से छुड़ाई गई बच्चियों ने काउंसलर्स को वहां के दर्दनाक और पीड़ादायक माहौल के बारे में बताया है। एक पीड़िता ने बताया क‍ि उसे सुबह नाश्‍ते में दो सूखी रोटियां और अचार दिया जाता था और दिन भर काम कराया जाता था। संचालकों का मन इतने से ही नहीं भरता था। रात में उनका यौन शोषण भी किया जाता था। बच्चियों पर तरह-तरह के प्रतिबंध भी लगाए गए थे। मसलन कैदी के रूप में जीवन बिताने वाली ये बच्चियां यदि गलती से भी छज्‍जे पर आ जाती थीं तो उन्‍हें जबरन कमरे में ले जाया जाता था। बच्चियों ने शेल्‍टर होम के भयावह माहौल का यह सच गोरखपुर से काउंसलिंग करने आई टीम के सदस्‍यों को बताया है।

सामूहिक विवाह में दोगुने उम्र वाले पुरुषों से जबरन शादी: यातना गृह बने विध्‍यवासिनी बालिका संरक्षण गृह की बच्चियों ने बताया क‍ि उन पर यौन संबंध बनाने के लिए जोर-जबरदस्‍ती करने के अलावा दोगुने उम्र के पुरुषों से शादी करने के लिए भी मजबूर किया जाता था। इसके लिए‍ बकायदा सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाता था। ‘नवभारत टाइम्‍स’ के अनुसार, पीड़िताओं ने काउंसलर्स को बताया क‍ि ‘बड़ी’ और ‘छोटी’ मैडम सामूहिक विवाह का आयोजन करवाती थीं। इसमें लड़कियों को दोगुनी उम्र के पुरुषों के साथ शादी करने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्‍होंने बताया क‍ि फरवरी 2018 में ऐसे ही एक सामूहिक समारोह का आयोजन किया गया था। इसमें शेल्‍टर होम की दो लड़कियों पर ज्‍यादा उम्र के पुरुषों से विवाह करने के लिए जोर डाला गया था। हालांकि, दबाव के बावजूद दोनों लड़कियां इसके लिए तैयार नहीं हुई थीं।

मेडिकल कराने से इनकार: शेल्‍टर से छुड़ाई गईं लड़कियों का मेडिकल भी कराया गया। हालांकि, दो नाबालिग बच्चियों ने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया। ऐसे में डॉक्‍टरों के पैनल ने भी जांच करने से मना कर दिया। उन्‍होंने कहा क‍ि बच्चियों की सहमति के बगैर मेडिकल टेस्‍ट नहीं किया जा सकता है। बता दें क‍ि संरक्षण गृह से तीन बच्‍चों को भी आजाद कराया गया है। इनमें दो, आठ और 10 वर्ष के मासूम शामिल हैं।

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