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देवबंद उपचुनाव: आजम खां को सपाइयों ने ही लिया निशाने पर

उत्तर प्रदेश विधानसभा की देवबंद सीट के उपचुनाव में उतरी सपा को पार्टी की गुटबंदी से नुकसान होने का डर सताने लगा है।

Author देवबंद | January 23, 2016 9:44 PM
उत्‍तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश विधानसभा की देवबंद सीट के उपचुनाव में उतरी सपा को पार्टी की गुटबंदी से नुकसान होने का डर सताने लगा है। पार्टी उम्मीदवार मीना राणा की पहली बड़ी बैठक के दौरान वक्ताओं ने जिस तरह से अपनी भड़ास निकाली, उससे कार्यकर्ताओं और नेताओं की गुटबंदी उजागर हो गई। चुनाव प्रभारी प्रदेश के श्रम मंत्री शाहिद मंजूर और एमएलसी वीरेंद्र चौधरी गुटबंदी देखकर हतप्रभ रह गए।

सपा के स्थानीय मुस्लिम चेहरे पूर्व पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी ने कांग्रेस उम्मीदवार पालिकाध्यक्ष माविया अली के बहाने स्थानीय निकाय मंत्री मोहम्मद आजम खां पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में उतरने से पहले तक माविया अली आजम खां की गोद में बैठे हुए थे। उन्होंने करोड़ों रुपए देवबंद के विकास के लिए आजम खां से लिए और विकास के नाम पर मोटी गांठ बनाई। अब उसी के बूते माविया अली सपा के खिलाफ भी मैदान में उतरकर ताल ठोंक रहे हैं।

सपा युवा नेता फरहान गाडा ने कहा कि देवबंद के चार नेताओं हुलाशराय सिंघल, नवाज खां देवबंदी, डा. अनवर एवं उस्मान अबेहटवी को राज्य मंत्री दर्जे के साथ लालबत्ती गाड़ियां मिली हुई हैं। लेकिन दुखद बात यह है कि वे लोग कभी भी सपा के मंच पर दिखने का काम नहीं करते हैं। उन्होंने चुनाव प्रभारी मंत्री से आग्रह किया कि वे सत्ता का सुख भोग रहे इन चारों नेताओं को भी चुनाव की जिम्मेदारी देने का काम करें।

एक नेता ने चौ. जगपालदास जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता को जिलाध्यक्ष पद से हटाकर पुन: राज सिंह माजरा को जिले की कमान सौपें जाने के औचित्य पर सवाल उठाए। एक अन्य नेता ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं दिग्गज गुर्जर नेता के निधन पर सपा आलाकमान में शामिल किसी भी नेता के शोक जताने के लिए नहीं आने को लेकर गुर्जर बिरादरी में जबरदस्त नाराजगी बनी हुई है जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र राणा की जीत में गुर्जर बिरादरी की अहम भूमिका रही थी।

इसमें चौ. यशपाल सिंह की भूमिका मुख्य रूप से रही थी। कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्रंी अखिलेश यादव ने 2012 के चुनाव के मौके पर देवबंद के लोगों से अपील की थी कि यदि वे यहां से सपा को जिताते हैं तो वह सरकार बनने पर देवबंद को जिला बनाने का काम अवश्य करेंगे। लेकिन सरकार बने चार साल हो गए हैं न तो अभी तक देवबंद को जिला बनाया गया और न ही 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की गई है।

श्रम मंत्री शाहिद मंजूर ने भरोसा दिया कि इस मामले को वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष रखने का काम करेंगे। लेकिन कार्यकर्ता इतने से ही संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि वादाखिलाफी का चुनाव में नुकसान हो सकता है। इस पर ठोस कार्रवाई अमल में लाए जाने की जरूरत है।

मंच पर मौजूद पार्टी के नेताओं ने कार्यकर्ताओं से अनुशासन और संयम से काम लेने का बार-बार आग्रह किया। उनका कहना था कि चुनाव के मौके पर नाराजगी जताने से पार्टी की जीत की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। बैठक में आजम खां समर्थक सरफराज खां, पूर्व विधायक विमला राकेश, सपा जिलाध्यक्ष राज सिंह माजरा, सपा उम्मीदवार मीना सिंह, अरुण राणा समेत दजर्नों प्रमुख नेता मौजूद रहे।

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