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उत्तराखंड में डेंगू का कहर, भाजपा ने की स्वास्थ्य मंत्री को बर्खास्त करने की मांग

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को बर्खास्त करने की मांग की है।

Author देहरादून | August 22, 2016 5:04 AM
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत। (पीटीआई फाइल फोटो)

उत्तराखंड में डेंगू के साढ़े तीन सौ से ज्यादा डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं उत्तरकाशी मौरी ब्लॉक के तिवारी और पितारी गांवों में डायरिया और बुखार से दो लड़कियों की मौत हो गई है और पचास से ज्यादा बच्चे बीमार पड़े हैं। बीमार पड़ने वाले बच्चों की उम्र 1 से 15 साल के बीच है। वहीं देहरादून में बुखार के चलते छह गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। वहीं हल्द्वानी में सांप के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, उसे जब सरकारी अस्पताल ले जाया गया परंतु वहां सांप काटने के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं थे। इंजेक्शन के अभाव में उसने दम तोड़ दिया। देहरादून में दून अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था की गई है। परंतु वहां दवाइयों का टोटा पड़ा हुआ है। उत्तराखंड भाजपा ने सरकारी अस्पतालों में लापरवाही से हो रही मौतों के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को बर्खास्त करने की मांग की है। चौहान ने कहा कि दून अस्पताल में पिछले एक-डेढ़ महीने के दौरान छह गर्भवती महिलाओं की इलाज में लापरवाही की वजह से मौत हो चुकी है। कोटद्वार के सरकारी अस्पताल में बेहोशी के इंजेक्शन के ओवरडोज से पांच लोगों की मौत हो चुकी है।

हल्द्वानी के मेडिकल कालेज और शोभन सिंह जीना बेस अस्पताल में साढ़े तीन घंटे तक सांप के काटने पर इंजेक्शन नहीं और मरीज ने दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि चार दिन पहले दून अस्पताल में डायलिसिस मशीन में आर ओ का पानी न मिलने से एक मरीज की मौत हो गई। उन्होंन कहा कि इस समय प्रदेश में डेंगू का प्रकोप फैला हुआ है और राज्य सरकार सोई हुई है। इस समय उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, उधमसिंह नगर जिलों में सबसे ज्यादा डेंगू का कहर बरप रहा है। हरिद्वार में दो दिन में 3 से ज्यादा डेंगू के मामले अब तक सामने आ चुके हैं। इन सब में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। डेंगू के फैलने का खतरा और ज्यादा बढ़ता जा रहा है। मगर हरिद्वार में स्वास्थ्य विभाग अभी तक कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।

हरिद्वार जिला अस्पताल में डेंगू के इलाज का कोई इंतजाम ना होने से डेंगू के मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है। पिछले साल से ही डेंगू की जांच के लिए जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेटर मशीन धूल फांक रही है। हरिद्वार के डेंगू के मरीजों को इलाज के लिए देहरादून के निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। वहीं उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उनका विभाग डेंगू की रोकथाम के लिए सही कदम उठा रहा है। विपक्ष को इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए।

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