40 हजार खड़े ट्रकों के साथ कई हाथ बेरोजगार

नोटबंदी ने ट्रांसपोर्ट उद्योग की कमर तोड़ दी है। ट्रांसपोर्टरों के पास नकदी नहीं होने की वजह से करीब 40 हजार ट्रक सड़कों पर खड़े हैं। सरकार को ट्रांसपोर्ट उद्योग को राहत देने के लिए उदारता दिखानी चाहिए।

Author नई दिल्ली | Updated: December 10, 2016 1:28 AM
नोटबंदी ने ट्रांसपोर्ट उद्योग की कमर तोड़ दी है।

नोटबंदी ने ट्रांसपोर्ट उद्योग की कमर तोड़ दी है। ट्रांसपोर्टरों के पास नकदी नहीं होने की वजह से करीब 40 हजार ट्रक सड़कों पर खड़े हैं। सरकार को ट्रांसपोर्ट उद्योग को राहत देने के लिए उदारता दिखानी चाहिए। दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ढिल्लो ने पत्रकारों को बताया कि आॅल इंडिया परमिट के तहत लगभग 48 लाख ट्रक असंगठित क्षेत्र के देश के इस सबसे बड़े उद्योग में पंजीकृत हैं जिन पर लगभग प्रत्यक्ष तौर पर 2 करोड़ और अप्रत्यक्ष तौर पर 5 करोड़ लोगों की आजीविका निर्भर है। नोटबंदी की मार ने नकदी से चलने वाले इस उद्योग की मुख्य कड़ी छोटे मोटर मालिकों की कमर तोड़ दी है। क्योंकि डीजल से लेकर टोल टैक्स सहित मार्ग के सभी खर्चों का भुगतान ड्राइवरों की ओर से नकदी में करने का चलन है और अधिकतर मालभाड़ा भी ड्राइवरों को नगदी में मिलता है।

एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि नोटबंदी के बाद नकदी की कमजोर तरलता ने गाड़ियों का चलना मुश्किल कर दिया है। त्रिलोचन सिंह ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार लगभग 20 लाख ट्रक नोटबंदी के कारण काम में पैदा हुई रुकावट की मार झेल रहे हैं। जिस कारण उन्हें अपना घर चलाने और बैंकों का कर्जा वापस करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि वे नोटबंदी के खिलाफ नहीं हंै, लेकिन सदियों से चली आ रही उनकी नगदी व्यवस्था के पटरी पर आने से पहले यह फैसला उनके उद्योग को खत्म करने की दिशा में सुनामी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि नोटबंदी से ट्रांसपोर्टर के व्यवसाय से सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। 6 रुपए प्रति लीटर का सेस डीजल और पेट्रोल पर लगने के कारण सरकार के खजाने में 70 हजार करोड़ रुपए एकमुश्त इस वित्तीय वर्ष में आने की उम्मीद थी।

उसी तरह सरकार को राजमार्गों पर लगे टोल टैक्स से 17 हजार करोड़ का टोल टैक्स प्राप्त होना था, जिसके लक्ष्य की प्राप्ति अब मुमकिन नहीं लग रही है। एसोसिएशन का कहना है कि जब एक ट्रक सड़क पर चलता है तो ड्राइवर, खलासी, मालिक एवं बैंक को प्रत्यक्ष रूप से और पेट्रोल पंपों, ढाबे, मिस्त्री, मजदूर, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, बीमा कंपनी तथा कई अन्य लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर कमाई का जरिया प्राप्त होता है। इस नोटबंदी की मार से राहत देने के लिए सरकार को गुहार लगाते हुए उन्होंने कई मांगें रखीं। इनमें चालू खाते से नगदी निकालने की सीमा 50 हजार रुपए साप्ताहिक से बढ़ाकर ट्रांसपोर्टरों के लिए 5 लाख की जाए, बैंकों के कर्ज पर चल रही गाड़ियों को 6 महीने बाद ब्याजमुक्त किश्त की अदायगी की सुविधा दी जाए, चल रही बीमा पॉलिसी को बिना किसी भुगतान के अगले 6 महीने के लिए अवधि बढ़ाई जाए और सरकारी टैक्स के भुगतान में छूट दी जाए।

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