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नोटबंदी पर अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेयक पेश

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को नोटबंदी से संबंधित विनिर्दिष्ट बैंक नोट (दायित्वों की समाप्ति) अध्यादेश 2016 की जगह लेने वाले विधेयक को लोकसभा में पेश किया जिसमें 31 दिसंबर 2016 के बाद पुराने 1000 और 500 रुपए के नोटों को रखने, उनका लेनदेन करने या प्राप्त करने को प्रतिबंधित किया गया है।

Author नई दिल्ली | February 4, 2017 2:29 AM
अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को नोटबंदी से संबंधित विनिर्दिष्ट बैंक नोट (दायित्वों की समाप्ति) अध्यादेश 2016 की जगह लेने वाले विधेयक को लोकसभा में पेश किया जिसमें 31 दिसंबर 2016 के बाद पुराने 1000 और 500 रुपए के नोटों को रखने, उनका लेनदेन करने या प्राप्त करने को प्रतिबंधित किया गया है। वित्त मंत्री के विधेयक पेश करने से पहले तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सौगत राय ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि यह विधेयक गैरकानूनी है।
हालांकि जेटली ने संसद की कार्यवाही संचालन के नियम के तहत तृणमूल सांसद सौगत राय के विधेयक का विरोध करने के आधार पर ही सवाल खड़ा किया और कहा कि किसी विधेयक का उसकी विधायी क्षमता या उसके असंवैधानिक होने के आधार पर ही विरोध किया जा सकता है। दोनों आधारों पर यह उनकी दलील कहीं नहीं ठहरती है।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में यह कहा गया है कि संसद सत्र में नहीं होने के कारण यह विधान लाना आवश्यक हो गया था। इसलिए राष्ट्रपति द्वारा बैंक नोटों में दायित्वों को समाप्त करने के लिए 31 दिसंबर, 2016 को अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी। विधेयक में प्रावधान है कि कोई व्यक्ति 31 दिसंबर, 2016 के नियत दिन के बाद से विनिर्दिष्ट बैंक नोट यानी 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को नहीं रखेगा, अंतरित या प्राप्त नहीं करेगा। विधेयक में इस धारा का उल्लंघन करने वालों पर 10,000 रुपए का जुर्माना या उल्लंघन करते हुए रखे गये विनिर्दिष्ट बैंक नोटों के अंकित मूल्य की रकम के पांच गुना, जो भी ज्यादा हो, अदा करने का दंडनीय प्रावधान है।

वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी की अधिसूचना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 26 (2) के तहत जारी की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत आठ नवंबर, 2016 को 500 और 1000 रुपए के उस समय तक प्रचलित नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी। सदन में विधेयक पेश किए जाने के दौरान सौगत राय ने कहा कि आठ नवंबर को संसद को संज्ञान में लिए बिना प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा कर दी जो ‘अवैध’ थी। उन्होंने कहा कि यह अधिसूचना भारतीय रिजर्व बैंक को जारी करनी थी, सरकार को नहीं।

राय ने कहा कि यह विधेयक मंत्री की क्षमता के दायरे में नहीं आता है और इससे संबंधित अध्यादेश अवैध है जिसकी जगह विधेयक लाया जा रहा है।
विधेयक में यह उपबंध है कि भारत का कोई नागरिक अगर घोषणा करता है कि वह नौ नवंबर से 30 दिसंबर 2016 के बीच भारत से बाहर था और जो आठ नवंबर 2016 को या उससे पहले 500 और 1000 रुपए के अमान्य किए गए नोट रखे हुए था उसे अनुग्रह अवधि (ग्रेस पीरियड) के भीतर ऐसी घोषणाओं या कथनों के साथ रिजर्व बैंक के कार्यालयों में या उसके द्वारा निर्धारित तरीके से जमा करने का अधिकार होगा। विधेयक में ‘अनुग्रह अवधि’ से आशय केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से निर्दिष्ट उस अवधि से है जिसमें कानून के मुताबिक पुराने नोट जमा किए जा सकते हैं।

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