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विपक्ष ने की पूर्वोत्तर क्षेत्र से अफस्पा हटाने की मांग

पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र्र विकास व वहां के युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की राह में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफस्पा) को बड़ी बाधा बताते हुए बुधवार को लोकसभा में कई दलों के सदस्यों ने सरकार से आग्रह किया कि इसे वापस लेने पर विचार किया जाए।

Author नई दिल्ली | Published on: April 28, 2016 4:13 AM
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पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र्र विकास व वहां के युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की राह में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफस्पा) को बड़ी बाधा बताते हुए बुधवार को लोकसभा में कई दलों के सदस्यों ने सरकार से आग्रह किया कि इसे वापस लेने पर विचार किया जाए।
सामान्य बजट के संबंध में 2016-17 के लिए उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांग पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के थोकचोम मेनिया, बीजद के तथागति सथपति, तेदेपा के राममोहन नायडू आदि ने पूर्वोत्तर के कई राज्यों से अफस्पा हटाए जाने पर सरकार से गंभीरता से विचार करने की मांग की। कांग्रेस के थोकचोम मेनिया ने कहा कि मणिपुर में परमिट प्रणाली खत्म होने से कई समस्याएं सामने आई हैं। अगर 1949 में मणिपुर का भारत में पूर्ण रूप से विलय हो गया होता, तो अभी जो कई समस्याएं हैं, वे पैदा ही नहीं होतीं। मणिपुर में एक बड़ी समस्या अफस्पा के कारण पैदा हुई है। मणिपुर से अफस्पा हटाया जाए।

बीजद के तथागत सथपति ने कहा कि पिछले कई दशकों में सरकारें आई और गईं लेकिन पूर्वोत्तर के बारे में उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया। आज भी इस क्षेत्र के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि 50 साल से पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अफस्पा लगाया गया है। पूर्वोत्तर के युवाओं को शेष भारत से जोड़ने के मार्ग में यह बड़ी बाधा है। सरकार इस क्षेत्र से अफस्पा हटाए और युवाओं को शेष भारत से जुड़ने का मार्ग प्रशस्त करे तो इस क्षेत्र में उग्रवाद अपनी स्वाभावित मौत मर जाएगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अफस्पा के दौरान 50 साल में सशस्त्र बलों के हाथों 50 हजार नागरिक मारे गए हैं। अफस्पा बिना शर्त हटाया जाए। उन्होंने कहा कि अफस्पा हटाने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहीं इरोम शर्मिला को पद्म सम्मान दिया जाना चाहिए।

बीजद सदस्य ने आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं को सांस्कृतिक रूप से शेष भारत से जोड़ने की जरूरत है न कि सशस्त्र बलों के भरोसे छोड़ने की। पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के विकास में योगदान कर सकता है और इसके लिए कनेक्टिविटी जरूरी है। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मद में आबंटन जरूरत के हिसाब से काफी कम होने का सरकार पर आरोप लगाया।

कांग्रेस के टी मेनिया ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए कम आबंटन का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की इस क्षेत्र के विकास में कोई रुचि नहीं है। तेदेपा के राममोहन नायडू ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के संदर्भ में सरकार के रुख में बदलाव आया है। नगा शांति संधि, जैविक खेती के विकास की पहल, पूर्वोत्तर के युवाओं का कौशल विकास महत्त्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि अफस्पा एक अहम विषय है। इससे जुड़ी संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को सभी पक्षों के साथ चर्चा कर इसे वापस लेने पर विचार करना चाहिए।

भाजपा की विजया चक्रवर्ती ने कहा कि पिछली लगातार बनी कांग्र्रेस सरकारों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की उपेक्षा की जिससे यहां भीषण बेरोजगारी है। इस क्षेत्र में उग्रवाद का एक बड़ा कारण बेरोजगारी है। मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस दिशा में पहल की है और इस क्षेत्र के सामाजिक आर्थिक विकास पर ध्यान दिया है। इसके लिए संतुलित विकास को प्रोत्साहित किया गया है।

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