Demand Draft used to turn black Money in white at Bengaluru - डिमांड ड्राफ्ट के जरिए चालाकी से ऐसे किया काले धन को सफेद, सीबीआई ने धर दबोचा - Jansatta
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डिमांड ड्राफ्ट के जरिए चालाकी से ऐसे किया काले धन को सफेद, सीबीआई ने धर दबोचा

बैंक एसोसिएशन अधिकारियों का कहना है कि यह आरबीआई नियमों के खिलाफ है। डीडी को नकद के एवज में जारी नहीं किया जा सकता।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

नोटबंदी के बाद आय कर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और देश भर की पुलिस हरकत में है। देश भर के अलग-अलग जगहों पर रोज छापेमारी हो रही है और बड़ी मात्रा में नई करेंसी बरामद हो रही है। जिन नोटों को आम लोगों के पास होना चाहिए था उन पैसों को गिरोह बनाकर लोगों ने अपने पास जमा कर रखे हैं। इस प्रक्रिया में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। खुलासों में नए-नए तरीकों का भी पता चल रहा है। एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक बेंगलुरु के एक बैंक में ऐसी ही धांधली का पर्दाफाश हुआ है जिसमें बार-बार डिमांड ड्राफ्ट जारी किया गया और उसे कैंसिल कर एक प्राइवेट कंपनी के मालिक को नई नकदी पहुंचाई जा रही थी।

बेंगलुरू में बसावनगुड़ी की सेंट्रल बैंक शाखा पर सीबीआई की नज़र तब पड़ी जब अगरबत्ती बनाने वाली एक कंपनी ओंकार परिमल मंदिर के डायरेक्टर एस गोपाल ने अपने बेटे अश्विन सुन्कु के साथ 70 लाख रुपये के 149 डिमांड ड्राफ्ट बैंक से जारी करने को कहा। यह डीडी बजाज फायनेंस लिमिटेड के नाम पर 15 और 18 नवंबर को जारी किए गए। डीडी का भुगतान नगदी में पुराने नोटों को देकर किया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों में कंपनी मालिक ने ड्राफ्ट रद्द कर दिया और बैंक ने उन्हें सारे नए नोटों में डीडी की रकम लौटाई।

बैंक एसोसिएशन अधिकारियों का कहना है कि यह आरबीआई नियमों के खिलाफ है। डीडी को नकद के एवज में जारी नहीं किया जा सकता। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ के अध्यक्ष एस एस सिसौदिया कहते हैं ‘डीडी को सिर्फ ग्राहक के खाते को डेबिट करके जारी किया जा सकता है। ये काम काउंटर पर पैसा देकर नहीं किया जा सकता। नए नियमों के अनुसार अगर कोई ग्राहक काउंटर पर नगदी लेकर आता है और डीडी जारी करने का आग्रह करता है तो यह नहीं किया जा सकता। इसे सिर्फ ग्राहक के खाते से ही जारी किया जा सकता है।’

सीबीआई ने इस मामले में गोपाल सुन्कु और बैंक के वरिष्ठ मैनेजर लक्ष्मी नारायाण को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई को संदेह है कि नारायण की मिलीभगत के बगैर यह लेनदेन मुमकिन नहीं था। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर को रात 8 बजे 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने का एलान किया था। इसके बाद से बैंकों में लंबी-लंबी कतारों में आम आदमी लगा है लेकिन कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों से सांठगांठ करके करोड़ों की करेंसी बदल ली।

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