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पड़ी दिल्ली की फटकार तो खट्टर फिर मर्सिडीज पर सवार

सादगी का ढिंढोरा पीटने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का महंगी गाड़ी का शौक सरकारी खजाने पर भारी पड़ गया।

Author चंडीगढ़ | June 3, 2017 12:46 AM
सादगी का ढिंढोरा पीटने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का महंगी गाड़ी का शौक सरकारी खजाने पर भारी पड़ गया। कई विवादों के बीच महंगी लैंड क्रूजर गाड़ी खरीदने वाले मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने दिल्ली दरबार की फटकार के बाद गाड़ी को छोड़ वापस मर्सीडीज़ गाड़ी की सवारी शुरू कर दी है।

संजीव शर्मा

सादगी का ढिंढोरा पीटने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का महंगी गाड़ी का शौक सरकारी खजाने पर भारी पड़ गया। कई विवादों के बीच महंगी लैंड क्रूजर गाड़ी खरीदने वाले मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने दिल्ली दरबार की फटकार के बाद गाड़ी को छोड़ वापस मर्सीडीज़ गाड़ी की सवारी शुरू कर दी है। लैंड क्रूजर का क्या होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। महंगी गाड़ी का खेल तब बिगड़ा जब इसके बुलेट प्रूफ बनाने तथा अन्य रख-रखाव का बजट 67 करोड़ तक पहुंच गया। जिसके बाद यह कार सीएम के गले की फांस बन गई।

हरियाणा में आमतौर पर यह परंपरा रही है की जब भी सूबे में नई सरकार सत्ता संभालती है, तो मंत्री कार शाखा द्वारा मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों को नई गाड़ियां दी जाती हैं । 2014 में जब भाजपा ने पहली बार सत्ता संभाली तो मुख्यमंत्री ने विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस बार हरियाणा में नई कार नहीं खरीदी जाएगी। शपथ ग्रहण के बाद भाजपा के मंत्रियों ने पुराने कांग्रेसी मंत्रियों की कार में सवारी शुरू कर दी। लेकिन यह प्रक्रिया ज्यादा समय तक नहीं चली। मंत्रियों ने जहां नई कारों की सवारी शुरू कर दी, वहीं पिछले वर्ष जुलाई में मुख्यमंत्री के काफिले के लिए सरकार ने लैंड क्रूजर गाड़ी खरीदी थी। जिसकी कीमत करीब एक करोड़ 35 लाख थी।

सूत्रों की मानें तो सीएम के काफिले में कोई भी नई गाड़ी शामिल करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह ली जाती है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। केवल पुलिस की सलाह पर कार खरीद ली गई। जुलाई में यह गाड़ी आ गई और वीवीआइपी नंबर एचआर 78-0001 के साथ इसका पंजीकरण भी हो गया। मुख्यमंत्री ने कुछ समय इसकी सवारी भी की। इसके बाद सुरक्षा कारणों के चलते लैंड क्रूजर गाड़ी को बुलेट प्रूफिंग के लिए हरियाणा पुलिस की गाड़ी शाखा में भेज दिया गया। मंत्री कार शाखा ने बुलेट प्रूफिंग व अन्य सुरक्षा उपकरणों के लिए 67 करोड़ का बजट बना डाला।

इसी दौरान सरकार की ओर से पुलिस को यह काम करवाने से रोक दिया गया। कुछ दिन गाड़ी खड़ी रही और इसके बाद सीएमओ के एक अधिकारी के मौखिक आदेशों पर लैंड क्रूजर को राजभवन भेज दिया गया। तब से यह गाड़ी हरियाणा राजभवन के एक कोने में खड़ी धूल फांक रही है। सूत्रों के अनुसार भाजपा शासित राज्यों में किसी भी सीएम के पास इतनी महंगी गाड़ी नहीं थी। सीएम द्वारा महंगी गाड़ी खरीदने और फिर से बुलेट प्रूफ करवाने का जब बजट तैयार हुआ, तो इस बारे में दिल्ली दरबार को सूचना मिल गई। यह घटनाक्रम उन दिनों का है जब हरियाणा के विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। विवाद से बचने के लिए सीएम ने इस गाड़ी से किनारा करना ही उचित समझा। सीएम अब चंडीगढ़ काफिले में शामिल मर्सिडीज कार में चल रहे हैं। यह गाड़ी दो लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी है। यह कार 2010 में खरीदी गई थी

अब राज्यपाल को गाड़ी अलाट करने पर मंथन
मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा लैंड क्रूजर गाड़ी को छोड़ दिया गया है। यह गाड़ी कई माह से राजभवन में खड़ी है। मंत्री कार शाखा के अधिकारियों द्वारा सरकार को तीन बार पत्र लिखकर कहा जा चुका है कि अगर सीएम के काफिले में इस गाड़ी को शामिल नहीं किया जाना है तो फिर इसे अधिकारिक तौर पर राज्यपाल को अलॉट कर दिया जाए। लेकिन सरकार की ओर से इस मामले में भी कोई कदम नहीं उठाया गया है।

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