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कार की मार से बेहाल दिल्ली की हवा, प्रदूषण पर नहीं लग सकती लगामः CSE

ट्रकों के प्रदूषण में कटौती एक अच्छा कदम है। लेकिन बड़ी चुनौती दिल्ली में हर साल आ रही नई कारों का जखीरा और बाहर से रोजाना आने वाली चार पहिया गाड़ियों का रेला भी है।

Author नई दिल्ली | Published on: June 4, 2016 2:18 AM
दिल्ली ट्रैफिक

ट्रकों के प्रदूषण में कटौती एक अच्छा कदम है। लेकिन बड़ी चुनौती दिल्ली में हर साल आ रही नई कारों का जखीरा और बाहर से रोजाना आने वाली चार पहिया गाड़ियों का रेला भी है। लिहाजा व्यापक रणनीति पर चल कर ही दिल्ली की हवा सांस लेने लायक बनाई जा सकती है।
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर विज्ञान व पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने कहा है दिल्ली में प्रदूषण की समस्या पर तब तक लगाम नहीं लगाई जा सकती जब तक कि शहर के अंदर बाहर से आने वाले इस रेले को नियंत्रित न किया जाए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सीएसई की ओर से वास्तविक समय में किए गए सीमा पार यातायात सर्वेक्षण में पता चला है कि बाहर से आने वाले निजी कारों के अलावा यात्री वाहन का कुल वायु प्रदूषण के बोझ (टोटल पार्टिकुलेट लोड) का 22 फीसद है।

यह न केवल दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के उपायों को बेअसर कर रहे हैं बल्कि पार्किंग के लिए समस्या पैदा कर रहे हैं। सीएसई ने कहा कि दिल्ली में अब तक किए उपाय काफी नहीं है। सीएसई ने कहा कि हालत यह है कि बसों आटो और कारों के लिए व्यापक तौर पर सीएनजी योजना लागू करने के बावजूद दिल्ली में अब भी डीजल ईंधन से होने वाला प्रदूषण बढ़ रहा है।

सीएसई ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में बाहर से रोजाना आने वाली डीजल कारों, टैक्सियों और एसयूवी की कुल संख्या पिछले वित्त वर्ष में दिल्ली में पंजीकृत हुए डीजल वाहनों की संख्या का ढाई गुना है। एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन संपर्क को दृढ़ता व तेजी से बढ़ाने की बजाय केंद्र और राज्य सरकारें दोनों शहर की सड़कों को हाइवे और एलिवेटेड कॉरिडोरों में बदलने की योजना बना रही हैं। ताकि दिल्ली से और ज्यादा निजी वाहन गुजर सकें। जबकि दिल्ली पहले ही कारों के लिए एक प्रदूषण हाइवे है।

बढ़ते मोटराइजेशन व डीजलाईजेशन का नतीजा यह है कि सभी महानगरों में दिल्ली की जहरीली हवा के चलते फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा है। कैंसर पंजीकरण योजना के आकड़े के हवाले से कहा कि फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लिहाजा युद्ध सत्र पर व्यापक रणनीति बनाकर काम करना होगा। साथ ही सार्वजानिक परिवहन क ो मजबूत करने और आधुनिकतम तकनीकों के अपग्रेडेशन से प्रदूषणस्रोतों से निपटना होगा।

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