दिल्ली वाले इस साल भी नहीं फोड़ सकेंगे दीवाली में पटाखे, दिल्ली सरकार ने लगाया प्रतिबंध

केजरीवाल ने कहा कि पिछले साल व्यापारियों द्वारा पटाखों के भंडारण के पश्चात प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए देर से पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था जिससे व्यापारियों का नुकसान हुआ था। सभी व्यापारियों से अपील है कि इस बार पूर्ण प्रतिबंध को देखते हुए किसी भी तरह का भंडारण न करें।

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दिल्ली में पटाखों पर इस साल भी रहेगा प्रतिबंध (फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

दिल्ली सरकार ने दीवाली में पटाखा फोड़ने पर इस साल भी प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि पिछले 3 साल से दीवाली के समय दिल्ली के प्रदूषण की खतरनाक हालत को देखते हुए पिछले साल की तरह इस बार भी हर प्रकार के पटाखों के भंडारण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है। जिससे लोगों की जिंदगी बचाई जा सके।

उन्होंने कहा कि पिछले साल व्यापारियों द्वारा पटाखों के भंडारण के पश्चात प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए देर से पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था जिससे व्यापारियों का नुकसान हुआ था। सभी व्यापारियों से अपील है कि इस बार पूर्ण प्रतिबंध को देखते हुए किसी भी तरह का भंडारण न करें। बताते चलें कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए इस साल केजरीवाल काफी सक्रिय दिख रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात का समय मांगा था।

इस संबंध में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री के सचिव ने केंद्रीय मंत्री के निजी सचिव को एक पत्र लिखा है। केजरीवाल ने सोमवार को कहा था कि वह पूसा बायो-डीकम्पोजर की ऑडिट रिपोर्ट के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात करेंगे और उनसे किसानों के बीच इसे मुफ्त वितरित करने के लिए दिल्ली के आसपास के राज्यों को निर्देश देने का आग्रह करेंगे। बायो-डीकम्पोजर एक प्रकार का तरल पदार्थ है जो 15-20 दिनों में पराली को खाद में बदल सकता है।

उन्होंने कहा था कि एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा कराए गए ऑडिट में पूसा बायो-डीकम्पोजर का उपयोग काफी प्रभावी पाया गया है। दिल्ली सरकार ने पिछले साल यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार तरल पदार्थ का प्रयोग किया था। पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पिछले साल कहा था कि पूसा बायो-डीकम्पोजर का पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में उपयोग किया जाएगा और अगर यह तकनीक सफल होती है तो और क्षेत्रों में इसका विस्तार किया जाएगा।

किसानों का कहना है कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच 10-15 दिनों का छोटा सा अंतराल होता है और वे पराली जलाते हैं क्योंकि यह पुआल के प्रबंधन तथा अगली फसल के लिए खेत को तैयार करने का किफायती और समय बचाने वाला तरीका है।

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