Delhi Pollution Control Planning: दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों में होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली सरकार ने संकरी सड़कों की सफाई के लिए 30 छोटी ईवी गाड़ियां खरीदने को मंजूरी दी है। इन मशीनों को एमआरएसएम भी कहा जाता है। इस खरीद की वजह यह है कि अभी प्रशासन के पास सफाई की जो मशीने हैं, उनकी छोटी सड़कों पर पहुंच काफी सीमित हैं।
वर्तमान में दिल्ली प्रशासन के पास मौजूद सफाई की मशीनें केवल राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों की मुख्य सड़कों को ही सफाई के लिए कवर कर पाती हैं, जिसके चलते सफाई का नेटवर्क छोटा रह जाता है, जबकि एमआरएसएम की वजह से सफाई का दायरा बढ़ाया जा सकेगा।
रेखा गुप्ता कैबिनेट ने दी मंजूरी
दरअसल, मंगलवार 29 सितंबर को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के तहत 250 वार्डों में फैली 854 सड़कों में से लगभग 609 किलोमीटर सड़कों को नई मशीनों से कवर किया जाएगा, जिनकी यातायात के लिए खुली चौड़ाई (राइट ऑफ वे – 32.81 फीट) 10 मीटर से कम है।
मशीनों को संचालित करेगा MCD
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 30 मशीनें खरीदने के लिए अनुदान प्राप्त होगा और वह इन्हें तैनात और संचालित करेगा। सूत्र बताते हैं कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए ही केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिल्ली सरकार से नवंबर तक इन मशीनों को खरीद कर जमीन पर उतारने का प्रपोजल दिया था।
केंद्र ने बताई थी 500 मशीनों की जरूरत
मई 2026 में ही रिपोर्ट्स में यह सामने आया था कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में कुल 505 एमआरएसएम (मल्टीपल स्केलिंग मशीन) की जरूरत बताई थी, लेकिन इनमें से 80 प्रतिशत तो थीं ही नहीं। वर्तमान में इन मशीनों की संख्या महज 98 है। रिकॉर्ड्स से पता चला है कि केंद्र ने 20 फीट से कम चौड़ाई वाली 9,855 किमी सड़कों के लिए 246 छोटी मशीनें; 20-60 फीट चौड़ाई वाली 7,277 किमी सड़कों के लिए 91 मध्यम मशीनें; और 60 फीट से अधिक चौड़ाई वाली 13,409 किमी मुख्य सड़कों के लिए 168 बड़ी मशीनें खरीदने का प्रस्ताव दिया था।
इस मामले में मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि व्यापक तैनाती से पहले जमीनी स्तर पर प्रदर्शन का आकलन करने के लिए प्रारंभिक चरण सीमित पैमाने पर होगा। अधिकारी ने कहा, “यह एक पायलट प्रोजेक्ट की तरह है। पहले कम संख्या में यूनिट्स को तैनात किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि यह कारगर है या नहीं और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों को समझा जा सके।”
कई देशों की व्यवस्था से सीख रही केंद्र-राज्य सरकार
इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार दक्षिण कोरिया, जापान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मशीनीकृत सफाई मॉडलों से सीख ले रही है, साथ ही इंदौर जैसे शहरों के अनुभवों का भी अध्ययन कर रही है।
अभी केवल पायलट प्रोजेक्ट…
इस पायलट प्रोजेक्ट से मौजूदा सड़क सफाई प्रणाली की कमियों को दूर करने की उम्मीद है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी जो सड़क सफाई वाले वाहन प्रशासन के पास हैं, उनके जरिए राजधानी की केवल 20-30% सड़कों की सफाई हो पाती है लेकिन नई मशीनों के जमीन पर उतरने से संकरी सड़कों पर धूल-प्रदूषण की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने कहा है कि इन मशीनों के काम को सुचारू रूप से कराने के लिए आम आदमी की भी अहम भूमिका होगी। उनके मुताबिक, सड़क सफाई से एक दिन पहले घोषणाएं करनी होंगी ताकि लोगों को जानकारी मिल सके और वे अपने वाहन उसी के अनुसार पार्क कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि राज्य स्तरीय एजेंसियों को एक साथ बड़ी संख्या में छोटी मशीनों को तैनात करना मुश्किल लग रहा था, जिसके चलते पहले कम संख्या में मशीनों के साथ शुरुआत करने और फिर धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
कई रिसर्च में मशीनों को बताया गया था अहम जरूरत
दिल्ली सरकार के अनुसार प्रस्तावित 30 अतिरिक्त एमआरएसएम की तैनाती पर 10 वर्षों में लगभग 393.73 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। 2016 में आईआईटी-कानपुर के एक अध्ययन में पाया गया था कि दिल्ली के वार्षिक पीएम10 उत्सर्जन का लगभग 56% और पीएम2.5 उत्सर्जन का 38% सड़क की धूल के कारण होता है।
फरवरी में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सड़क की चौड़ाई के आधार पर विभिन्न श्रेणियों के MRSM की तैनाती के लिए तकनीकी और परिचालन मानदंड जारी किए थे। 1 घन मीटर से कम हॉपर क्षमता और 2 मीटर से कम परिचालन चौड़ाई वाली छोटी मशीनें 10 मीटर से कम चौड़ाई वाली सड़कों के लिए उपयुक्त हैं।
बिजली या सीएनजी से चलेंगी मशीनें
CAQM के मानदंडों के अनुसार, छोटे MRSM को प्रति शिफ्ट कम से कम आठ घंटे काम करना होगा और न्यूनतम 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। साथ ही, धूल को दबाने और उसके पुनः वायुमंडल में फैलने से रोकने के लिए एक एकीकृत जल छिड़काव प्रणाली और कण पदार्थ निस्पंदन प्रणाली भी आवश्यक है। नए MRSM बिजली या CNG से चलने वाले होने चाहिए।
2025 में, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एजेंसियों को एमआरएसएम की खरीद में तेजी लाने का निर्देश दिया था। पिछले साल अप्रैल में हुई एक बैठक में, अधिकारियों ने अनुमान लगाया था कि व्यापक कवरेज के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कम से कम 1,000 अतिरिक्त मशीनों की आवश्यकता होगी।
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