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Delhi Violence: दिल्ली दंगों के तीन साल, अब तक दंगा-आगजनी के 10 प्रतिशत मामलों में भी नहीं आ सका फैसला

ये सभी 695 मामले धारा 147, 148, 149 और 436 के तहत दर्ज किए गए थे।

delhi riots| delhi| CAA-NRC
दिल्ली के यमुना विहार में दंगों के बाद जली हुई दुकानें और वाहन (Source- EXPRESS PHOTO BY PRAVEEN KHANNA)

दिल्ली दंगों के तीन साल पूरे होने के बाद भी अब तक इस मामले में न्याय का पहिया धीरे-धीरे घूम रहा है। साल 2020 में दिल्ली में हुए इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस के पूर्वोत्तर जिले ने कड़कड़डूमा कोर्ट में दंगा और आगजनी के 695 मामले दर्ज किए गए थे। 20 फरवरी 2023 तक 47 मामलों में फैसला आ चुका है। इनमें से 36 बरी हो चुके हैं।

695 केस में से अब तक केवल 47 मामलों में आया फैसला

दिल्ली हिंसा के 3 साल बाद तक दंगा आगजनी के दसवें हिस्से से भी कम मामलों में फैसला सामने आया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने इन मामलों के रिकॉर्ड खंगालने पर पाया कि अभियुक्तों की पहचान करने में अभियोजन पक्ष की अक्षमता के कारण अधिकांश लोग बरी हो गए थे। इनमें से बरी किए गए 15 मामलों में अदालतों ने पाया कि पुलिस ने काफी देर के बाद अभियुक्तों की पहचान की। दैनिक डायरी (DD) में एंट्री न होने, गिरफ्तारी ज्ञापन पर हस्ताक्षर न होने और अभियुक्तों की संलिप्तता के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करने वाली कोई लिखित रिपोर्ट जैसे पुलिस स्टेशन रिकॉर्ड के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया था।

वहीं, बरी किए गए 10 मामलों में पुलिस के गवाहों ने अभियुक्तों की पहचान करते हुए कहा कि वे दंगों से पहले उन्हें जानते थे क्योंकि वे क्षेत्र के बीट अधिकारी थे। हालांकि, उनकी गवाही परीक्षण की कसौटी पर खरी नहीं उतरी। बरी किए गए तीन मामलों में, अदालत ने कहा कि पुलिस गवाहों ने जिरह के दौरान कहा कि उन्हें मेमोरी लॉस की समस्या है और उसके लिए दवा भी ले रहे थे। वहीं, ऐसे 8 मामलों में पुलिस ने चार मामलों में गुप्त मुखबिरों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर गिरफ्तारियां कीं। तीन आदेशों में अदालत ने कहा कि पुलिस ने विरोधाभासी बयान दिए थे।

आखिरी वक्त में मुकर गए गवाह

फैसला आने में देरी पर अभियोजन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसके लिए गवाहों के मुकर जाने और कठिन परिस्थितियों में अभियुक्तों की पहचान करने की चुनौती को जिम्मेदार ठहराया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “गवाहों ने दंगाइयों की पहचान की और फिर वे सभी उस वक्त मुकर गए जब उन्हें गवाही देने के लिए कहा गया था। हमारे सामने मुख्य रूप से चुनौती यह थी कि आरोपी हेलमेट, मास्क पहने हुए थे और जांचकर्ताओं के लिए दंगों के दौरान उनकी पहचान करना कठिन था कि क्योंकि वे कानून और व्यवस्था बनाए रखने में भी जुटे हुए थे। हम बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर करके जांच में खामियों को दूर करने की पूरी कोशिश करते हैं।”

दिल्ली दंगों में बरी किए गए 36 लोगों में से 20 हिंदू हैं जबकि 16 मुस्लिम हैं। जिन 11 लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे सभी हिंदू हैं। पांच मामलों में दोषियों ने दो साल से ज्यादा समय जेल में बिताया था, जबकि कईयों ने 76 दिन जेल में बिताए थे। इन 695 मामलों के अलावा, 63 मामले क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल द्वारा निपटाए जा रहे हैं, जो हत्या और यूएपीए की धाराओं से संबंधित हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से 30 से अधिक मामले ऐसे हैं जिनमें आरोप तय किए जा चुके हैं और 29 मामले अभियोजन साक्ष्य के स्तर पर हैं।

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First published on: 26-02-2023 at 07:46 IST
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