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दिल्ली विश्वविद्यालय को सिर्फ सीबीएसई के परिणाम का इंतजार क्यों?

नए दाखिले सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अपने नए चेहरे के साथ अवतरित हुआ है। उसके दावों और हकीकत का फासला लगातार बढ़ रहा है।

नए दाखिले सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अपने नए चेहरे के साथ अवतरित हुआ है। उसके दावों और हकीकत का फासला लगातार बढ़ रहा है।

नए दाखिले सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अपने नए चेहरे के साथ अवतरित हुआ है। उसके दावों और हकीकत का फासला लगातार बढ़ रहा है। आॅनलाइन दाखिला पोर्टल को शुरू हुए चार दिन हो चुके हैं, 75 हजार से ज्यादा छात्र पंजीकरण कर चुके हैं लेकिन आवेदन फॉर्म को पूरा भरने के लिए इन सबको दोबारा इंटरनेट सुविधा के लिए धन खर्चना होगा और समय बर्बाद करना होगा। उन्हें फॉर्म भरने में 150 के बजाय 500 रुपए तक खर्चने पड़ेंगे! क्योंकि उनके भरे फॉर्म विश्वविद्यालय की वजह से अधूरे हैं। आॅनलाइन दाखिला पोर्टल में आवदेन फॉर्म को नौ अनुभाग व पेज (टैब) में बांटा गया है उसमें से चार अनुभाग व पेज को विश्वविद्यालय ने बंद कर रखा है। जिन्हें भरने के लिए उन्हें दोबारा या तीसरी बार साइबर कैफे में जाना और निराश होकर लौटना पड़ रहा है। छात्रों को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि बंद रखे गए अनुभाग व पेज कब खुलेंगे। दबी जुबान से अधिकारी कहते हैं कि सीबीएसई के परिणाम आने के बाद ही ये खोले जाएंगे।

सवाल यह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए केवल सीबीएसई ही जरूरी है? जबकि देश में 30 से ज्यादा राज्यस्तरीय बोर्ड हैं। यदि राज्यों के ओपन स्कूलों को नियंत्रित करने वाले निकायों को भी शामिल कर लिया जाए तो इनकी संख्या 42 को पार कर जाती है। ये वे बोर्ड हैं जो सीबीएसई के अलावा अपने अपने क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा को नियंत्रित करते हैं। इनमें से कई बोर्ड के नतीजे घोषित हो चुके हैं। लेकिन डीयू उनको दाखिले की पावती देने को तैयार नहीं है। अगर केवल सीबीएसई परिणाम को ही आधार बनाकर दाखिले सत्र चलाना था तो विश्वविद्यालय को उस बोर्ड के नतीजों का इंतजार करना चाहिए था। बीते चार दिनों से बज रही आवेदन की डुगडुगी डीयू के दाखिला सत्र को तमाशा बना दिया है।

इतना ही नहीं डीयू ने जो नए कलेवर में आॅनलाइन दाखिला पोर्टल जारी किया है उसकी हकीकत भी चौकाने वाली है। मसलन दाखिला की चाहत रखने वाले अभी तक जिन 75 हजार से ज्यादा छात्र नेट के जरिए डीयू के दहलीज पर पहुंचे हैं, उन्हें पाठ्यक्रमों की जानकारी के लिए नाकों चने चबाने पड़े हैं। जिन्होंने ‘अपलाइड साइकोलॉजी’ में स्नातक में जानकारी चाही और विवरण के लिए पोर्टल खंगाला तो भौचक्के रह गए। डीयू का स्मार्ट पोर्टल उसकी जानकारी बीए (अरबी) पाठ्यक्रम के सामने दे रहा था।

कंप्यूटर साइंस विषय में दाखिले की योग्यता की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स विषय पर और इलेक्ट्रॉनिक्स विषय की जानकारी बीएससी (फूड-टेक्नोलॉजी) विषय के समाने दी जा रही है। राजनीति विज्ञान की जानकारी मनोविज्ञान विषय पर और मनोविज्ञान विषय की जानकारी बीए पंजाबी विषय पर पोर्टल दे रहा है। इतना ही नहीं, गणित की जानकारी पोर्टल माइक्रोबाइलाजी पर और माइक्रोबाइलाजी की जानकारी डीयू का स्मार्ट पोर्टल भौतिकी पाठ्यक्रम में दे रहा है। उधर, डीयू की हेल्पलाइन 011-27666756 विद्यार्थियों के सवालों का सही जवाब नहीं दे पा रही है। कई छात्रों ने ओपन डेज में यह बात रखी। उन्होंने हेल्पलाइन नंबर बढ़ाने का सुझाव दिया है। इनमें बाहर से आने वालों में ज्यादातर एनसीआर के छात्र हैं। उनका कहना है कि दिक्कतों को दूर करने के लिए बनाई गई डीयू की हेल्पलाइन ठीक से काम नहीं कर रही है। ओपन डेज में पहुंचे कई छात्रों ने यह सवाल उठाया।

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