उत्तरी दिल्ली के एक इलाके में ट्यूशन पढ़ाने वाले एक शिक्षक ने कथित तौर पर लगभग दो वर्षों तक तीन नाबालिग छात्राओं का यौन उत्पीड़न किया। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उसने बताया कि आरोपी ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने इस बारे में किसी से बात की तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे, जिनमें एआई द्वारा निर्मित आपत्तिजनक तस्वीरें प्रसारित करना और उनके परिवार के सदस्यों को जान से मार देना शामिल है।

छात्राओं का आरोप है कि आरोपी ने उन्हें लड़कों के साथ क्षेत्र में घूमते हुए देखा था, जिसके बाद न केवल उनकी पिटाई की, बल्कि उनका यौन शोषण भी किया। ये लड़कियां तीन वर्षों से एक कोचिंग संस्थान में ट्यूशन ले रही थीं। पुलिस ने बताया कि लड़कियों में से एक ने आरोप लगाया कि शिक्षक कक्षाओं के दौरान अक्सर छात्राओं को अनुचित तरीके से छूता था।

पुलिस के अनुसार उसकी हरकतों से परेशान होकर एक पीड़िता ने आपबीती अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद वारदात की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने पीड़िता की काउंसलिंग कराई और बाद में आरोपी धीरज चौधरी के खिलाफ बलात्कार, पाक्सो, बंधक बनाने और मारपीट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश कर रही है।

जान से मारने की देता था धमकी

एआई द्वारा निर्मित आपत्तिजनक तस्वीरें प्रसारित करने और छात्राओं के परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी देता था। गौरतलब है कि भारत में अगर किसी व्यक्ति पर बलात्कार, POCSO Act, बंधक बनाने और मारपीट जैसी धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, तो भारतीय कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। आम तौर पर ये धाराएं Indian Penal Code (IPC) और POCSO कानून के तहत लगाई जाती हैं। इनके तहत FIR दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।

पुलिस मामले की जांच करती है और सबूत, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान आदि जुटाए जाते हैं। साथ ही आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाता है। कोर्ट जरूरत समझे तो न्यायिक हिरासत में जेल भेज सकती है।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करती है। इसके बाद मुकदमा (ट्रायल) शुरू होता है। अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो अलग-अलग धाराओं के अनुसार सजा हो सकती है, जैसे बलात्कार के मामले में आम तौर पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, POCSO Act (यदि पीड़ित नाबालिग है)के तहत कड़ी सजा, कई मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

वहीं, बंधक बनाने के मामले में कई साल की जेल और जुर्माना। जबकि मारपीट के मामले में जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। POCSO से जुड़े मामलों में अक्सर फास्ट ट्रैक या विशेष POCSO कोर्ट में सुनवाई होती है ताकि फैसला जल्दी हो सके।

आसान शब्दों में कहें तो अगर आरोप साबित हो जाएं तो आरोपी को लंबी जेल की सजा, जुर्माना और कठोर कानूनी दंड मिल सकता है।