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बीवी की लाश को तंदूर में भूना था, जेल से निकल सुशील शर्मा बोला- जोड़ों की होनी चाहिए काउंसलिंग

सुशील शर्मा ने बताया कि "पिछले 23 सालों में मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है। इस दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है। शुरुआत में मेरा स्वभाव प्रभुत्वशाली था, लेकिन अब उसमें बदलाव आ गया है।

Author Published on: December 23, 2018 11:39 AM
सुशील शर्मा (खड़े हुए) अपने माता-पिता के साथ। (express photo)

जेल में जाने के बाद किसी अपराधी को उसके किए की सजा तो मिलती ही है, साथ ही यह सोचने का वक्त भी मिलता है कि जो अपराध उसने किया, वह किन परिस्थितियों में हुआ और क्या उसे टाला जा सकता था? ऐसा ही कुछ अनुभव तंदूर कांड में दोषी ठहराए गए सुशील शर्मा को भी हुआ है। बता दें कि साल 1995 में अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करने और उसके शव को तंदूर में जलाने के दोषी पाए गए सुशील शर्मा को उम्रकैद की सजा काटने के बाद शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। अपने घर पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सुशील शर्मा ने बताया कि “पिछले 23 सालों में मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है। इस दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है। शुरुआत में मेरा स्वभाव प्रभुत्वशाली था, लेकिन अब उसमें बदलाव आ गया है। मेरे माता-पिता ने मेरी गलतियों के लिए बहुत सहा है, मैं इसके लिए खुद को कभी माफ नहीं कर सकता।”

सुशील शर्मा ने बताया कि “मैं जेल में ऐसे बहुत से लोगों से मिला और मुझे ये पता चला कि 90% लोग आदतन अपराधी नहीं होते हैं। उन्होंने गुस्से में आकर अपराध किया और फिर जेल में जाकर उसका पश्चाताप करते हैं। खासकर जो लोग रोडरेज (सड़क पर होने वाले झगडों) के दौरान अपराध करते हैं, वो लोग अपना गुस्सा कंट्रोल कर सकते हैं। मैंने ऐसे लोगों से बात कर नोट्स तैयार किए हैं और ये फैसला किया है कि उन लोगों के लिए कुछ करूंगा, जो कार ड्राइव करते हैं।” अपने किए पर पश्चाताप करते हुए सुशील शर्मा ने कहा कि “हमें कभी भी किसी को लेकर हद से ज्यादा पजेसिव नहीं होना चाहिए। उस वक्त (जब सुशील शर्मा ने अपराध किया था) बहुत कम काउंसलर थे। यदि मेरी काउंसलिंग हुई होती तो मुमकिन है कि मैं कभी भी अपनी पत्नी की हत्या नहीं करता।”

सुशील शर्मा ने कहा कि जो भी जोड़े अपनी शादीशुदा जिंदगी के बुरे दौर से गुजर रहे हैं, उन्हें 3 महीने तक काउंसलिंग लेनी चाहिए। बता दें कि साल 1995 में सुशील शर्मा ने अपनी पत्नी नैना साहनी की प्रेम संबंध के शक में गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद सुशील शर्मा ने नैना साहनी के शव को टुकड़े-टुकड़े कर उसे एक रेस्तरां के तंदूर में जलाने की कोशिश की थी। लेकिन पुलिस द्वारा उसे पकड़ लिया गया और दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने सुशील शर्मा को दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा सुनायी थी। इस पर सुशील शर्मा की तरफ से इस मामले में हाईकोर्ट में अपील की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से सुशील शर्मा को राहत मिली और सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। सजा के तहत सुशील शर्मा 23 साल जेल में बिता चुका है। जिसके बाद बीते शुक्रवार उसे जेल से रिहा कर दिया गया।

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